
श्रीकृष्ण से मिली सीख पर बोलीं सोनाक्षी बत्रा, भगवान ने कई भूमिकाएं निभाईं, फिर भी खुद को नहीं खोया
बॉलीवुड डेस्क। मुंबई
जगधात्री में मुख्य भूमिका निभा रही अभिनेत्री सोनाक्षी बत्रा ने जन्माष्टमी के मौके पर भगवान कृष्ण के साथ अपने जुड़ाव और उनके जीवन से मिलने वाली सीख के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि बचपन में जब वह अलग-अलग एक्टिविटी में हिस्सा लेती थीं और स्टेज पर परफॉर्म देने जाती थीं, तब उनके पिता हमेशा उन्हें भगवान कृष्ण का आशीर्वाद लेने के लिए कहते थे। उस समय वह इस बात का मतलब पूरी तरह नहीं समझ पाती थीं, लेकिन आज जब वह खुद अभिनय की दुनिया का हिस्सा हैं, तो उन्हें अपने पिता की वह बात गहराई से समझ आती है।
सोनाक्षी ने कहा, भगवान कृष्ण ने कई अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। वह बेटे भी थे, दोस्त भी, प्रेमी भी, मार्गदर्शक भी, रणनीतिकार और राजा भी, इन सभी भूमिकाओं के बीच उन्होंने कभी अपना असली स्वरूप नहीं खोया। मुझे लगता है कि एक अभिनेता के लिए भी यही बात बेहद खास है।
अभिनय में कलाकार को कई तरह के किरदार निभाने पड़ते हैं और हर किरदार की भावनाओं, दुनिया और सफर को जीना पड़ता है, लेकिन इन सबके बीच खुद को पहचानना भी जरूरी है। एक अभिनेता होने की यही एक सबसे खूबसूरत बात है कि वह अलग-अलग लोगों का किरदार निभाता है, उनकी भावनाओं और उनकी जिंदगी को महसूस करता है, लेकिन हर किरदार के पीछे कहीं न कहीं अपने असली रूप तक वापस आने का रास्ता भी खोजता है।
सोनाक्षी ने कहा, मेरे लिए जन्माष्टमी बचपन की उन मीठी यादों को ताजा करती है, जब पूरा परिवार मिलकर भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाता था। घर में सजावट होती थी और भोग तैयार किया जाता था। परिवार के सदस्य लड्डू गोपाल को बहुत प्यार से सजाते थे। उनके लिए सुंदर और छोटे-छोटे कपड़े लाए जाते थे, फूलों से उन्हें सजाया जाता था और घर में खूबसूरत झांकियां तैयार की जाती थीं। मेरी मां भगवान कृष्ण के लिए खास भोग बनाती थीं, जिसमें खासतौर पर खीर शामिल होती थी। इसके साथ ही भगवान कृष्ण को उनका पसंदीदा माखन भी चढ़ाया जाता था।
सोनाक्षी ने कहा, इन सभी चीजों में एक अलग खुशी होती थी। जन्माष्टमी से जुड़ी यही छोटी-छोटी परंपराएं इस त्योहार को बहुत खास बनाती हैं। इनसे घर का माहौल अपनापन और खुशी से भर जाता है और बचपन की यादें जिंदगीभर के लिए दिल में बस जाती हैं।
सोनाक्षी ने दही हांडी को लेकर कहा, एक व्यक्ति शायद ऊपर रखी हांडी तक पहुंच सकता है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए पूरी टीम की जरूरत होती है। हर हाथ जरूरी होता है और हर व्यक्ति दूसरे को संभालता है। अगर एक व्यक्ति का संतुलन बिगड़ता है, तो उसका असर पूरी टीम पर पड़ता है।
यह बात सिर्फ दही हांडी पर नहीं, बल्कि हर काम और हर पेशे पर लागू होती है।
भगवान कृष्ण को लेकर सोनाक्षी ने कहा, आज मेरे लिए कृष्ण का मतलब यह साहस है कि इंसान जिंदगी में कई भूमिकाएं निभाए, लेकिन खुद को न खोए। अपनी जिम्मेदारी पूरी करने का भरोसा रखे और जो उसके हाथ में नहीं है, उसे ईश्वर पर छोड़ने की समझ भी रखे। -आईएएनएस
जानिए अपनी Girlfriend के बारे में 8 अनजानी बातें
परिणीती का मस्त Style देखकर आप भी कहेंगे हाय!
क्या देखा अपने: दिव्यांका त्रिपाठी का ये नया अदांज






