राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र निर्माण में खिलाड़ियों के योगदान को सराहा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र निर्माण में खिलाड़ियों के योगदान को सराहा



नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को भारत के राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में खिलाड़ियों के योगदान को रेखांकित किया। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अपना कर्तव्य निभाने वाला हर नागरिक देश की प्रगति में योगदान देता है। अपने भाषण में राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत के विकास में छात्रों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डॉक्टरों, किसानों, श्रमिकों, कारीगरों, कलाकारों और विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों के साथ-साथ खिलाड़ियों के योगदान को भी विशेष रूप से सराहा। 

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस का उपयोग उस रास्ते पर विचार करने के अवसर के रूप में किया जाना चाहिए, जिस पर भारत 1947 में आजादी मिलने के बाद से चला है, और इससे जुड़ी जिम्मेदारियों को फिर से दोहराने के लिए भी इसका उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर मैं आप सभी को इस राष्ट्रीय त्योहार की हार्दिक बधाई देती हूं। कुछ ही घंटों में हमारा देश अपनी आजादी के 80वें वर्ष की शुभ शुरुआत का साक्षी बनेगा। देश और विदेश में रहने वाले सभी भारतीय इस त्योहार को बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। हमारा तिरंगा हमारी आजादी का प्रतीक है। हम इसे बहुत गर्व के साथ फहराते हैं। 

15 अगस्त, 1947 का जिक्र करते हुए, मुर्मु ने कहा कि आजादी ने देश के भविष्य को आकार देने की जिम्मेदारी उसके लोगों के हाथों में सौंप दी थी और इस बात पर जोर दिया कि आजादी का असली महत्व विदेशी शासन से मुक्त होने से कहीं अधिक है। उन्होंने आगे कहा, 15 अगस्त, 1947 को भारत माता गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हुईं। हर नागरिक स्वतंत्र भारत के भाग्य का निर्माता बन गया। आजादी का असली मतलब यह सुनिश्चित करना है कि सभी नागरिक अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के अवसरों का लाभ उठा सकें और भारत को दुनिया का अग्रणी राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में काम कर सकें। 

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत की प्रगति को विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लाखों नागरिक आगे बढ़ा रहे हैं, जिनमें खिलाड़ी भी शामिल हैं, जिनकी कोशिशों और उपलब्धियों ने देश के विकास और राष्ट्रीय गौरव में योगदान दिया है। उन्होंने छात्रों, शिक्षकों, विकास कार्य में शामिल वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डॉक्टरों और अन्य हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स, सभी सेक्टर के कर्मचारियों और किसानों की भी तारीफ की। 

राष्ट्रपति ने कहा कि देश बनाने की चल रही प्रक्रिया में उनका समर्पण सबसे अहम है। उन्होंने कारीगरों और कलाकारों, बुद्धिजीवियों, प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों, चुने हुए प्रतिनिधियों और न्यायपालिका के सदस्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने भारत के सुरक्षा बलों के सदस्यों के प्रति भी सम्मान जाहिर किया और देश की रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तीनों सशस्त्र बलों, सशस्त्र पुलिस बलों और पुलिस संगठनों में सेवा दे रहे लोगों की तारीफ की। 

उन्होंने कहा, कई नागरिक अलग-अलग कामों में लगे हैं, और हर वह नागरिक जो हमारे संविधान में बताए गए मौलिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करता है, वह हमारे देश-निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार है। मैं उन सभी की दिल से तारीफ करती हूं। राष्ट्रपति ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों और दुनियाभर में भारत के डिप्लोमैटिक मिशनों में काम करने वाले अधिकारियों का भी जिक्र किया और कहा कि उनके योगदान से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति और प्रतिष्ठा बढ़ती है। -आईएएनएस

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