रुक्मिणी वसंत का भव्य अनावरण, यश की फिल्म टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स में मेलिसा के रूप में

रुक्मिणी वसंत का भव्य अनावरण, यश की फिल्म टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स में मेलिसा के रूप में

मुंबई। यश की टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स हर नए खुलासे के साथ और भी गहरी, डार्क और बेबाक होती जा रही है। यह फिल्म अब एक ऐसी सिनेमाई दुनिया गढ़ रही है, जो हर मोड़ पर चौंकाती है। इसी रोमांचक सफर में मेकर्स ने एक बड़ा पत्ता खोला है—रुक्मिणी वसंत की एंट्री, जो मेलिसा के किरदार में नजर आएंगी। शालीन, प्रभावशाली और बिल्कुल न झुकने वाली मेलिसा के रूप में रुक्मिणी की मौजूदगी फिल्म के इंटेंस ड्रामा को एक नया आयाम देती है। 

यह फिल्म रुक्मिणी वसंत और यश के बीच पहली दमदार साझेदारी को भी चिन्हित करती है, वो भी निर्देशक गीतू मोहनदास की खास सिनेमाई दृष्टि के साथ। अपनी समझदार परफॉर्मेंस और भावनात्मक गहराई के लिए जानी जाने वाली रुक्मिणी की एंट्री इस बात का संकेत है कि दर्शकों को एक ऐसी अदाकारी देखने को मिलेगी, जो गीतू की परतदार और माहौल रचने वाली कहानी कहने की शैली में पूरी तरह घुली-मिली होगी। वहीं यश का सपना भी साफ झलकता है—एक ऐसी भारतीय फिल्म बनाना, जो स्केल में ग्लोबल हो और भावनाओं में हर किसी से जुड़ जाए। 

नादिया के रूप में कियारा आडवाणी, एलिज़ाबेथ के रूप में हुमा कुरैशी, गंगा के रूप में नयनतारा और रेबेका के रूप में तारा सुतारिया के दमदार फर्स्ट लुक्स के बाद, अब टॉक्सिक की रहस्यमयी दुनिया में मेलिसा की एंट्री होती है। 1960 के दशक के आखिरी दौर की एक रंगीन लेकिन धुंधली पार्टी की पृष्ठभूमि में मेलिसा खुद को पूरे आत्मविश्वास के साथ पेश करती हैं। चारों ओर जश्न, शोर और हलचल है, लेकिन उनकी नजरें एकदम सटीक और दृढ़ हैं। जहां बाकी दुनिया बहती हुई सी लगती है, वहीं मेलिसा हर कदम सोच-समझकर रखती हैं, ऐसे अंदाज़ में कि पूरी महफिल पर उनका ही असर छा जाता है। 

हर नए खुलासे के साथ फिल्म और भी धारदार होती जा रही है। इसका भावनात्मक दायरा फैल रहा है, सिनेमाई पैमाना और बड़ा हो रहा है और टॉक्सिक खुद को 2026 की सबसे बहुप्रतीक्षित भारतीय फिल्मों में मजबूती से स्थापित कर रही है। निर्देशक गीतू मोहनदास कहती हैं, रुक्मिणी में मुझे सबसे ज्यादा जो चीज़ पसंद है, वो है एक कलाकार के तौर पर उनकी बुद्धिमत्ता। वो सिर्फ अभिनय नहीं करतीं, वो किरदार को समझती हैं, उसे प्रोसेस करती हैं। उनके सवाल शक से नहीं, जिज्ञासा से आते हैं और यही बात मुझे भी एक निर्देशक के तौर पर और गहराई से सोचने पर मजबूर करती है। कई बार तो अपने ही फैसलों पर दोबारा विचार करने लगती हूं। उन्हें काम करते देख मुझे एहसास होता है कि स्क्रीन पर इंटेलिजेंस अक्सर वहां होती है, जो कहा नहीं जाता। 

शूट के बीच-बीच में मैं उन्हें चुपचाप अपनी डायरी में कुछ लिखते देखती हूं—सेट से जुड़े छोटे किस्से, अपने विचार। ये छोटे पल उनके प्रोसेस के बारे में बहुत कुछ कह जाते हैं। वो लगातार अपनी एक अंदरूनी दुनिया बना रही होती हैं। उनका यह अप्रोच मुझे बेहद सोच-समझ से भरा लगता है और सच कहूं तो कई बार मन करता है कि उनकी डायरी के पन्ने चुपके से पढ़ लूं, ताकि उस दिमाग को समझ सकूं, जो इतनी परतदार परफॉर्मेंस के पीछे है। यश और गीतू मोहनदास द्वारा लिखी गई और गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स को कन्नड़ और अंग्रेज़ी में एक साथ फिल्माया गया है। इसके साथ ही हिंदी, तेलुगु, तमिल, मलयालम और कई अन्य भाषाओं में डब वर्ज़न की योजना है, जो इसके ग्लोबल विज़न को साफ दर्शाता है। 

फिल्म की तकनीकी टीम भी उतनी ही दमदार है—नेशनल अवॉर्ड विजेता राजीव रवि सिनेमैटोग्राफी संभाल रहे हैं, संगीत में रवि बस्रूर का जादू होगा, एडिटिंग की कमान उज्ज्वल कुलकर्णी के हाथ में है और प्रोडक्शन डिजाइन टीपी आबिद ने किया है। हाई-ऑक्टेन एक्शन को हॉलीवुड के मशहूर एक्शन डायरेक्टर जेजे पेरी, जिन्हें जॉन विक के लिए जाना जाता है, के साथ नेशनल अवॉर्ड विजेता जोड़ी अंबरिव और केचा खाम्फाकडी ने कोरियोग्राफ किया है। वेनकट के. नारायण और यश द्वारा केवीएन प्रोडक्शंस और मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के बैनर तले बनी टॉक्सिक की भव्य थिएट्रिकल रिलीज़ 19 मार्च 2026 को तय है। यह लंबा फेस्टिव वीकेंड होगा, जब ईद, उगादी और गुड़ी पड़वा एक साथ आएंगे—और टॉक्सिक बड़े पर्दे पर जश्न को और भी बड़ा बनाने के लिए पूरी तरह तैयार होगी।

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