
महिला की सुरक्षा संवैधानिक अधिकार, हुबली पुलिस की कथित बर्बरता पर बोलीं महिला अधिकार कार्यकर्ता वृंदा आदिगे
बेंगलुरु। महिला अधिकार कार्यकर्ता वृंदा आदिगे ने बुधवार को कर्नाटक के हुबली शहर में पुलिस की ओर से भाजपा की एक महिला कार्यकर्ता पर कथित हमले और कपड़े उतारने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे बिल्कुल अस्वीकार्य और भयानक बताया है।
उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि महिला किस राजनीतिक पार्टी की है, क्योंकि जरूरी यह है कि वह देश की नागरिक है और उसे संवैधानिक अधिकारों के तहत सुरक्षा मिलनी चाहिए।
वृंदा आदिगे ने कहा, यह बिल्कुल अस्वीकार्य और भयानक है क्योंकि हम यहां उन पुलिसवालों और पुलिसकर्मियों की बात कर रहे हैं जिन्हें कानून लागू करने की ट्रेनिंग दी गई है। वे खुद कानून नहीं बन सकते।
उन्होंने आगे कहा, पुलिस वाहन के अंदर नागरिकों के सामने एक महिला के कपड़े उतारना, उसके साथ बदसलूकी करना और उसे पीटना पूरी तरह गलत है।
मैंने कहीं सुना कि उसने खुद अपने कपड़े उतारने की कोशिश की। ठीक है, लेकिन आप पुलिस हैं और आपको ऐसी स्थितियों को संभालने की ट्रेनिंग मिली है।
महिला पुलिसकर्मियों ने उसके चारों ओर घेरा क्यों नहीं बनाया? वे वहां क्या कर रही थीं? वे सब बस देख रही थीं। यह दिखाता है कि भले ही उन्हें ट्रेनिंग मिली हो, वे महिलाओं की इज्जत की रक्षा करने के लिए तैयार नहीं हैं। वे घबरा गईं। तो उन्हें पुलिस के तौर पर किस तरह की ट्रेनिंग मिल रही है? क्या उन्हें नहीं पता कि एक महिला की देखभाल कैसे करनी है? आप हर तरह के बहाने बना सकते हैं, लेकिन उनमें से कोई भी इस व्यवहार को सही नहीं ठहराता।
वृंदा आदिगे ने बताया कि ऐसी स्थितियों में आम लोग भी अक्सर ज्यादा जिम्मेदारी से काम करते हैं। आम नागरिक के तौर पर, कभी-कभी हम ऐसी घटनाएं देखते हैं जहां कोई महिला, जिसे शायद मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हों, खुद को निर्वस्त्र करने की कोशिश करती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में, दो या तीन लोग तुरंत उसकी गरिमा की रक्षा के लिए आगे आते हैं। तो पुलिस क्या कर रही थी? यहां जो हुआ वह मानवाधिकार और महिलाओं के अधिकारों दोनों का उल्लंघन है।
पुलिस कमिश्नर के डिटेल्स इकट्ठा करने वाले बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, पूरी जानकारी बाद में इकट्ठा की जा सकती है। पहले, जो भी लोग वहां मौजूद थे, उन्हें सस्पेंड किया जाना चाहिए। फिर जांच की जाए। किसी नागरिक के साथ इस तरह से बुरा बर्ताव करने का कोई बहाना नहीं हो सकता। संवैधानिक गारंटी को पुलिस को बनाए रखना चाहिए और उनकी रक्षा करनी चाहिए। वे बिल्कुल भी बहाने नहीं बना सकते। -आईएएनएस
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