मौमा दास: टेबल टेनिस का बड़ा चेहरा, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के लिए जीता स्वर्ण

मौमा दास: टेबल टेनिस का बड़ा चेहरा, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के लिए जीता स्वर्ण

नई दिल्ली। भारतीय टेबल टेनिस जगत में मौमा दास का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। लंबे समय से इस खेल में सक्रिय मौमा ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन किया है। मौमा दास का जन्म 24 जनवरी, 1984 को नारकेलडांगा, कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था। 

मौमा के टेबल टेनिस में आने की बड़ी वजह उनके पिता प्रबीर दास थे। वे खेलों के शौकीन थे और इसी वजह से उन्होंने बहुत ही छोटी उम्र में मौमा का परिचय टेबल टेनिस से कराया। समय के साथ इस खेल में उनकी रुचि बढ़ती चली गई और बाद में उन्होंने इसे अपना करियर बना लिया। 

मौमा ने सीमित संसाधनों के बावजूद कठिन मेहनत और पूर्ण समर्पण के दम पर टेबल टेनिस में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम बनाया है। विरोधियों के प्रति उनकी रणनीति बेहद आक्रामक होती है। अपने तेज रिफ्लेक्स और सटीक प्लेसमेंट के लिए जानी जाने वाली मौमा एकल और डबल्स दोनों इवेंट्स में बड़ा नाम हैं। 

मौमा ने अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय स्वर्ण पदक याकुत्स्क में दूसरे चिल्ड्रन ऑफ एशिया इंटरनेशनल स्पोर्ट्स गेम्स 2000 में जीता था। 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में बड़ी सफलता मिली थी। उन्होंने भारतीय टीम को रजत पदक दिलाने में अहम योगदान दिया था। 
दास ने वर्ष 1997 में मैनचेस्टर में अपनी पहली विश्व टेबल टेनिस चैम्पियनशिप में उपस्थिति दर्ज कराई थी। इसके बाद कुआलालंपुर (2000), ओसाका (2001), पेरिस (2003), दोहा (2004), ब्रेमेन (2006), जाग्रेब (2007), ग्वांगझू (2008), योकोहामा (2009), मॉस्को (2010), रॉटरडैम (2011), डॉर्टमुंड (2012), पेरिस (2013), सूजौ (2015), कुआलालंपुर (2016), और डसेलडोर्फ (2017)। दास और थाईलैंड की कोमवोन नानथाना, दोनों ने 17 बार अपने देश का प्रतिनिधित्व किया है, जो दोनों वर्गों में किसी भी एशियाई द्वारा सबसे ज्यादा है। 

मौमा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला टीम के साथ 2006 में कांस्य, 2010 में रजत, महिला डबल्स में 2010 में कांस्य, 2018 में महिला टीम के साथ स्वर्ण और महिला डबल्स के साथ रजत पदक जीता था। साउथ एशियन गेम्स में भी वह टीम इवेंट और महिला सिंगल और डबल में स्वर्ण जीत चुकी हैं। मौमा दास ने 75 अलग-अलग देशों के खिलाफ 400 से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले हैं। उन्हें 2013 में अर्जुन पुरस्कार से और 2021 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वह ऑयल इंडिया लिमिटेड में कार्यरत हैं। -आईएएनएस

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