ममता शंकर : घुंघरुओं की गूंज और सुरों के बीच पली-बढ़ी, विरासत में मिली कला, आज नृत्य और सिनेमा के संगम की पहचान

ममता शंकर : घुंघरुओं की गूंज और सुरों के बीच पली-बढ़ी, विरासत में मिली कला, आज नृत्य और सिनेमा के संगम की पहचान

नई दिल्ली। एक ऐसी कलाकार, जिन्होंने कला की विरासत को न सिर्फ अपनाया बल्कि उसे आगे भी बढ़ाया। घुंघरुओं की गूंज और सुरों के बीच पली-बढ़ी, माता-पिता से नृत्य की बारीकियां सीखीं और आगे चलकर एक सफल नृत्यांगना के साथ-साथ फिल्म अभिनेत्री के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाई। 

यह कहानी है बंगाली सिनेमा में अपने सशक्त अभिनय और शास्त्रीय नृत्य के लिए जानी जाने वाली ममता शंकर की। 7 जनवरी 1955 को कोलकाता में जन्मी ममता शंकर के जीवन में संगीत और नृत्य बचपन से ही रच-बस गए थे, क्योंकि वह पंडित रविशंकर, उदय शंकर, अमला शंकर और आनंद शंकर जैसे महान कलाकारों के परिवार का हिस्सा थीं। 

ममता शंकर, महान नृत्यांगना अमला शंकर और विश्वविख्यात नृत्यकार उदय शंकर की बेटी हैं। ममता के लिए कला सिर्फ साधना नहीं, बल्कि जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बन गई। उन्होंने अपने माता-पिता के मार्गदर्शन में कोलकाता स्थित उदय शंकर इंडिया कल्चर सेंटर से नृत्य कला के हर गुण को सीखा। इसके बाद ज्ञान प्रकाशम से भरतनाट्यम, तरुण सिंह से मणिपुरी, राघवन से कथकली और राजेन बोस से कथक में उन्होंने निपुणता हासिल की। 

ममता शंकर ने एक इंटरव्यू में कहा था, गुणी और सुविख्यात कलाकारों के बीच खुद को पाकर मैं खुद को गौरवान्वित महसूस करती हूं। नृत्य से ही अपने करियर की शुरुआत करते हुए ममता शंकर ने बंगाली सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने मृणाल सेन की फिल्म मृगया (1976) में मिथुन चक्रवर्ती के साथ डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने दूरत्व (1978), एक दिन प्रतिदिन (1979), गणशत्रु (1990), आगंतुक (1991) और दहन (1997) जैसी कई चर्चित फिल्मों में अभिनय किया। 

मृणाल सेन के अलावा उन्होंने सत्यजीत रे, रितुपर्णो घोष, बुद्धदेव दासगुप्ता और गौतम घोष जैसे बंगाली सिनेमा के कई जाने-माने फिल्म निर्माताओं की फिल्मों में भी काम किया। अभिनय के साथ-साथ ममता शंकर एक कोरियोग्राफर भी हैं। उन्होंने अपनी नृत्य मंडली के साथ देश-विदेश में कार्यक्रम किए। कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए ममता शंकर को कई पुरस्कार मिले। 

उन्हें साल 2016 में पश्चिम बंगाल नृत्य, नाटक और दृश्य कला अकादमी की ओर से अकादमी पुरस्कार, साल 2019 में समसामयिक नृत्य के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और वर्ष 2022 में भारत-बांग्लादेश काउंसिल की ओर से बंग रत्न सम्मान दिया गया। पिछले साल उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया। ममता शंकर आज भी नृत्य और सिनेमा की दुनिया में सक्रिय रहते हुए अपनी पारिवारिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही हैं। फिलहाल वह कोलकाता स्थित ममता शंकर डांस कंपनी की निदेशक हैं और नृत्य की नई पीढ़ी को प्रशिक्षित कर रही हैं। 

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