ईरान के रहते मध्य पूर्व में स्थायी शांति मुश्किल, भारत-इजरायल एफटीए जल्द होगा फाइनल : फ्लेउर हसन-नहूम

ईरान के रहते मध्य पूर्व में स्थायी शांति मुश्किल, भारत-इजरायल एफटीए जल्द होगा फाइनल : फ्लेउर हसन-नहूम

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय की विशेष दूत और यरुशलम की पूर्व डिप्टी मेयर फ्लेउर हसन-नहूम ने कहा कि ईरान लंबे समय तक चलने वाली क्षेत्रीय शांति के लिए सबसे बड़ी रुकावट है। उन्होंने अब्राहम समझौते को बढ़ाने का समर्थन किया और भारत की इजरायल के लिए एक अहम रणनीतिक साझेदार के तौर पर सराहना की। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत-इजरायल मुक्त व्यापार समझौता जल्द ही फाइनल हो जाएगा। 

सवाल : हालिया घटनाक्रम को देखते हुए मौजूदा स्थिति पर आपका आकलन क्या है? 

जवाब : मेरा मानना है कि अंततः इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान चाहे कोई भी समझौता करे या करने का दावा करे, उसका उद्देश्य शांति नहीं है। उसकी दिलचस्पी केवल शत्रुता और जिहादी विचारधारा को आगे बढ़ाने में रही है। पिछले 47 वर्षों से उसने अपने ही लोगों का दमन किया है। उसने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का काम किया है और अपने सहयोगी समूहों को वित्तीय मदद, प्रशिक्षण और समर्थन देकर क्षेत्र और दुनिया भर में लोगों की हत्या के लिए प्रोत्साहित किया है। 

ईरान एक वैश्विक आतंकी नेटवर्क को भी वित्तपोषित करता है। मुझे नहीं लगता कि ईरान के साथ कोई भी शांति समझौता लंबे समय तक टिक पाएगा। इसका उदाहरण यह है कि अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले शुरू कर दिए। इसके जवाब में अमेरिका ने भी कार्रवाई की है। मुझे नहीं लगता कि यह घटनाक्रम यहीं समाप्त होने वाला है। 

सवाल: इजरायल से जुड़े हालिया घटनाक्रम और ईरान युद्ध में उसकी भूमिका को लेकर आपके देश का क्या रुख है? क्षेत्रीय स्थिति में हो रहे बदलाव को आप कैसे देखती हैं? 

जवाब : मेरा मानना है कि क्षेत्रीय समीकरण निश्चित रूप से बदलेंगे। इस क्षेत्र में कुछ देश ऐसे हैं जो शांति और समृद्धि अपनाना चाहते हैं, जैसे इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन और मोरक्को। दूसरी ओर कुछ देश ऐसे हैं जो जिहादी विचारधारा और विनाश का समर्थन करते हैं। मेरे अनुसार, यही इस क्षेत्र का विभाजन है। इस श्रेणी में ईरान और कतर आते हैं। दुर्भाग्य से, जब तक उस शासन का अंत नहीं होता, जो इस्लामवाद, आतंकवाद और क्षेत्र में होने वाले हमलों को वित्तीय सहायता और समर्थन दे रहा है, तब तक इजरायल को इस संघर्ष में सक्रिय रहना पड़ेगा। दुर्भाग्य से, इजरायल इन हमलों का पहला निशाना है, हालांकि वह अकेला निशाना नहीं है। 

सवाल: हालिया सैन्य और कूटनीतिक घटनाक्रम का मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर क्या असर पड़ेगा? 

जवाब : हम जानते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट को बंद किया जाना, चाहे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) द्वारा हो या अमेरिकी कार्रवाई के कारण, पेट्रोल-डीजल की कीमतों के लिए अच्छा नहीं है। मुझे पता है कि मौजूदा हालात का भारत पर भी गंभीर असर पड़ रहा है, लेकिन मेरा मानना है कि दीर्घकालिक लाभ के लिए अल्पकालिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। 

किसी भी देश को यह अधिकार नहीं होना चाहिए कि वह खुद को वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग का मालिक समझे और तय करे कि वहां से कौन गुजरेगा और कौन नहीं। इसी वजह से वैश्विक बाजार प्रभावित हो रहे हैं। यह आवश्यक है कि ईरान की जनता, हमारे सहयोग से, उस शासन को सत्ता से हटाए जिसे हम अत्यंत हानिकारक मानते हैं। दुर्भाग्य से, जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता बनी रहने की आशंका है। 

सवाल: भविष्य में तनाव बढ़ने से रोकने और संबंधित पक्षों के बीच कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू करने के लिए क्या कदम जरूरी हैं? 

जवाब: जैसा कि मैंने शुरुआत में कहा था, मैं ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत में विश्वास नहीं रखती। मुझे नहीं लगता कि ऐसे किसी समझौते का कोई मतलब है, जिसे वे निभाने वाले नहीं हैं। इसी कारण इस सवाल का जवाब देने के लिए शायद मैं सही व्यक्ति नहीं हूं। हालांकि, मेरा मानना है कि अब्राहम अकॉर्ड्स राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियों में से एक था। इसके जरिए इजरायल और खाड़ी के कई देशों के बीच संबंध सामान्य हुए। 

मैं प्रार्थना करती हूं कि सऊदी अरब और ओमान जैसे अन्य देश भी अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल हों और इसका दायरा बढ़े। इस पहल को लेकर मैं काफी सकारात्मक हूं। मैं फिर वही बात दोहराऊंगी कि जब तक ईरान में मौजूदा सत्ता है और वह जिहादी संगठनों और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे समूहों को समर्थन और वित्तीय सहायता देता रहेगा, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है। 

सवाल : आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक वैश्विक नेता के रूप में कैसे देखती हैं? 

जवाब : प्रधानमंत्री मोदी मार्च में, ईरान के साथ युद्ध शुरू होने से ठीक पहले, इजरायल आए थे। उस दौरान कई बड़े समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए। मेरा मानना है कि वैश्विक व्यापार और विशेष रूप से भारत के साथ व्यापार के क्षेत्र में हमारा भविष्य बेहद उज्ज्वल है। भारत इजरायल के लिए केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि कूटनीति के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण साझेदार है। इसके अलावा, अब्राहम अकॉर्ड्स के संदर्भ में दो ऐसे महत्वपूर्ण विकास हैं, जो भारत के लिए भी बेहद लाभकारी हो सकते हैं। 

पहला है आईएमईसी, जो इजरायल और मध्य पूर्व के जरिए यूरोप तक संपर्क स्थापित करता है। दूसरा है आई2यू2, जिसमें भारत, इजरायल, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। मैं खुद इस पहल से जुड़ी रही हूं। मेरा मानना है कि दोनों पहल न केवल क्षेत्र के लिए, बल्कि भारत-इजरायल संबंधों को मजबूत करने और मध्य पूर्व में भारत की वैश्विक भूमिका को प्रभावी बनाने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। 

सवाल: भारत और इजरायल के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को आप किस तरह देखती हैं? 

जवाब: दो दौर की बातचीत पहले ही पूरी हो चुकी है। मैं इसे लेकर बेहद उत्साहित हूं और उम्मीद करती हूं कि हम बहुत जल्द मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर कर पाएंगे। जैसा मैंने पहले कहा, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ने भारत और इजरायल के संबंधों को मजबूत किया है। साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बीच बेहतर तालमेल और आपसी समझ भी मजबूत हुई है। 

अब कारोबार को अपना काम करने देना चाहिए। मेरा मानना है कि आपके देश और मेरे देश, दोनों में पर्याप्त उद्यमी हैं। हमें व्यापारिक समुदाय को वही करने देना चाहिए, जिसमें वह सबसे बेहतर हैं। सरकारों की भूमिका यह सुनिश्चित करने की होनी चाहिए कि वे मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करें और ऐसा माहौल बनाएं, जिससे दोनों देशों को समान रूप से लाभ मिले। 

सवाल: अंतिम समझौते से पहले दोनों पक्ष किन प्रमुख मुद्दों को सुलझाने पर काम कर रहे हैं? 

जवाब : इस तरह के समझौते बेहद जटिल होते हैं और इनमें कई तकनीकी व कानूनी पहलू शामिल होते हैं। इसलिए इन विषयों पर राजनयिकों को अपना काम करने देना चाहिए। हालांकि, मुझे पूरा विश्वास है कि इस समझौते पर बहुत जल्द हस्ताक्षर हो जाएंगे। 

सवाल: व्यापार और निवेश से आगे बढ़कर एफटीए भारत और इजरायल की रणनीतिक साझेदारी को किस तरह मजबूत करेगा? 

जवाब : यह ऐसा समझौता है, जिसकी दोनों देशों ने लंबे समय से इच्छा रखी है। जैसा कि मैंने पहले भी कहा, भारत इजरायल का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। अब्राहम अकॉर्ड्स और अमेरिकी प्रशासन की उस योजना के साथ, जिसके तहत भारत से मध्य पूर्व, इजरायल होते हुए यूरोप तक एक व्यापारिक गलियारा विकसित किया जा रहा है, यह पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इसका मतलब है कि भारत को अपने सामान और सेवाओं को केवल इजरायल ही नहीं, बल्कि यूरोप तक सीधे पहुंचाने का मार्ग मिलेगा। यही वजह है कि यह समझौता इतना महत्वपूर्ण है। 

-आईएएनएस

गोरापन पल भर में...अब आपके हाथों में

सोनाक्षी के बोल्ड लुक्स देखकर हैरान हो जाएंगे आप!

पुरुषों की इन 5 खूबियों पर मर-मिटती हैं महिलाएं



Warning: PHP Startup: Unable to load dynamic library '/opt/cpanel/ea-php54/root/usr/lib64/php/modules/xsl.so' - /lib64/libxslt.so.1: symbol xmlGenericErrorContext, version LIBXML2_2.4.30 not defined in file libxml2.so.2 with link time reference in Unknown on line 0