केजरीवाल ने हाईकोर्ट की महिला जज पर बनाया दबाव, न्यायमूर्ति को बदनाम करने के लिए चलाया कैंपेन: बांसुरी स्वराज

केजरीवाल ने हाईकोर्ट की महिला जज पर बनाया दबाव, न्यायमूर्ति को बदनाम करने के लिए चलाया कैंपेन: बांसुरी स्वराज


नई दिल्ली। भाजपा नेता और सांसद बांसुरी स्वराज ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा। बांसुरी स्वराज ने कहा, कल दिल्ली उच्च न्यायालय का एक आदेश आया है। 

जस्टिस स्वर्णकांता ने केजरीवाल की दबाव की रणनीति को खारिज करते हुए न्यायिक स्वतंत्रता का एक नया आयाम स्थापित किया है। हम उसका मिलकर अभिनंदन और स्वागत करते हैं। अरविंद केजरीवाल दबंग हैं। उन्होंने देश की सम्मानित न्यायपालिका की एक महिला सदस्य पर दबाव डालने की कोशिश की। 

केजरीवाल की दबाव बनाने की रणनीति को खारिज करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने उनके केस ट्रांसफर की मांग को अस्वीकार कर दिया। केजरीवाल ये बात भूल गए कि इस देश की न्याय प्रणाली उनकी सुविधा से नहीं चलती। इस देश की न्याय प्रणाली संविधान और कानून के तहत चलती है। 

बांसुरी स्वराज ने आगे कहा, केजरीवाल ने 9 मार्च को आए आदेश के बाद, 11 मार्च को दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के सामने अर्जी लगाई कि न्यायमूर्ति स्वर्णकान्ता के सामने से ये केस हटा दिया जाए, क्योंकि केजरीवाल को 9 मार्च को आया आदेश पसंद नहीं आया। यह बात साबित हो गई है कि आम आदमी पार्टी एक ड्रामा कंपनी है और केजरीवाल उस ड्रामा कंपनी के निर्देशक हैं। 13 मार्च को उन्होंने न्यायमूर्ति स्वर्णकान्ता के समक्ष अर्जी लगाई और कहा कि हमें आप पसंद नहीं हैं, आप स्वयं ही इस केस को त्याग दीजिए। इसके बाद शुरू हुआ इस देश के न्यायतंत्र के खिलाफ सोचा-समझा षड्यंत्र। 

आम आदमी पार्टी ने नैरेटिव कंट्रोल करने के लिए न्यायमूर्ति स्वस्वर्णकान्ता के खिलाफ एक दुर्भावनापूर्ण मीडिया और सोशल मीडिया कैंपेन चलाया। न्यायमूर्ति स्वर्णकान्ता पर व्यक्तिगत आरोप लगाए गए और उनके बच्चों के खिलाफ भी आरोप लगाए गए। यह किसी न्यायाधीश का मामला नहीं था, बल्कि एक निर्णायक षड्यंत्र था। यह धारणा का मामला नहीं था। यह नियंत्रण का मामला था। वे भूल गए कि अदालतें दबाव से नहीं, बल्कि संविधान से चलती हैं। 

बांसुरी स्वराज ने कहा, केजरीवाल न सिर्फ़ नाटकबाज़ी कर रहे हैं, बल्कि वे डरे हुए भी हैं। उन्हें पता है कि राउज एवेन्यू कोर्ट का आदेश हाई कोर्ट में न्यायिक जांच में शायद पास न हो। पिछले एक मामले में सभी सबूत, गवाह और सामग्री दिल्ली हाईकोर्ट के सामने पेश किए गए थे। उसी के आधार पर केजरीवाल और अन्य आरोपियों की ज़मानत दिल्ली हाई कोर्ट ने रद्द कर दी थी। 

केजरीवाल इसलिए डरे हुए हैं क्योंकि उन्हें पता है कि दिल्ली हाई कोर्ट यह सुनिश्चित कर सकता है कि दिल्ली की जनता को न्याय मिले। आम आदमी पार्टी का नारी विरोधी चेहरा सामने आया है। आम आदमी पार्टी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर महिलाओं का हक छीना है। आम आदमी पार्टी चाहती है कि महिलाएं सिर्फ वोट देने तक सीमित रही। 

गौरतलब है कि दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने उनके मामले की सुनवाई से हटने से साफ इनकार कर दिया है। केजरीवाल की ओर से दायर याचिका में जस्टिस शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्हें केस से अलग होने की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया। जस्टिस शर्मा ने कहा था कि उनकी न्यायिक गरिमा और ईमानदारी को दी गई यह चुनौती न केवल अनुचित है बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर प्रहार है। -आईएएनएस

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