
करिश्मा कपूर : सेक्सी और बिंदाज इमेज से बनाई पहचान
वर्ष 1991 में फिल्म "प्रेम कैदी" से अभिनय की शुरूआत करने वाली कपूर खानदार की करिश्मा कपूर ने हिन्दी फिल्मों में न केवल एक सफल अभिनेत्री के रूप में अपनी पहचान दर्ज कराई बल्कि समय-समय पर आलोचकों की प्रशंसा भी बटोरी है। करिश्मा कपूर खानदान की पहली बिटिया है, जिन्होंने घर की चौखट से बाहर कदम रखा और फिल्मों में अपना करिअर बनाया।
मधु जैन अपनी किताब "द कपूर्स" में इस घटना का जिक्र करते हुए लिखती हैं कि करिश्मा इस फिल्म के हीरोईन तो बन गयीं लेकिन बहुत ही घटिया तरीके से। साउथ की फिल्मों के हीरो हरीश उनके अपोजिट थे। इस फिल्म में करिश्मा का मेकअप और ड्रेसिंग सेंस बहुत ही गंदा था। घनी भौंहों के साथ उनके घुघराले बाल उन्हें एक ऎसी अल्ह़ड किशोरी के रूप में दिखा रहे थे जो पर्दे पर किसी भी रूप में नायिका नहीं दिखती। फिल्म औसत सफल हुई लेकिन इस फिल्म में करिश्मा की लांचçंग बहुत खराब हुई।
करिश्मा का बुरा दौर यहीं से चलना शुरू हो गया। आने वाले सालों में "पुलिस ऑफिसर", "जागृति", "सपने साजन के" जैसी फिल्में असफल हुईं तो करिश्मा का कैरियर चलने से पहले ही ठहर गया।
धमेंद्र, करिश्मा को अपने बेटे बॉबी के साथ फिल्म "बरसात" में लांच करना चाहते थे लेकिन करिश्मा की फिल्मों की बुरी गत देखकर वह पीछे हट गए। यहीं पर करिश्मा टूटने लगी थी। वह रात-रात भर रोती रहतीं। कभी बबिता तो कभी उनकी छोटी बहन उन्हें समझाती। घर का माहौल ऎसा होता कि घर में कोई भी खाना न खाता। सब चुपचाप एक-दूसरे को सहारा दे रहे होते। राज कपूर का नाम होने के बाद भी कोई ब़डा फिल्मकार करिश्मा को रीलांच करने के लिए आगे नहीं आया।
करिश्मा का कैरियर सही मायने में डेविड धवन ने बदला। 1994 में जब "राजा-बाबू" फिल्म आयी तब पहली बार करिश्मा को दर्शकों ने नोटिस किया। फिल्म भले ही गोविंदा की कॉमेडी की वजह से चली लेकिन करिश्मा के काम को भी सराहा गया। डेविड धवन ने करिश्मा की सेक्सी इमेज को भुनाने का प्रयास किया।
राजा बाबू फिल्म में "सरकायी लेओय खटिया" गाना खूब चला। इसी इमेज को खुद्दार फिल्म में सेक्सी सेक्सी मुझे लोग बोले गाने में भी भुनाया गया। मधु जैन लिखती है कि करिश्मा के कैरियर को सही दिशा 1996 में रिलीज हुई फिल्म "राजा हिंदुस्तानी" से मिली। इस फिल्म में करिश्मा के लुक को बदला गया। उन्हें सीधी बालों की विग लगायी गयी।






