
मैं भी भारत रत्न का हकदार हूं, वह भी जीते जी : बलबीर
चंडीगढ। मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने की मांग देशभर से उठती रही है। उनके नाम की सिफारिश प्रधानमंत्री कार्यालय भी भेजी जा चुकी है। इस बीच हॉक्ी के एक और दिग्गज बलबीर सिंह सीनियर ने इस सम्माान के लिए खुद को दावेदार बताया है। बलबीर 1948, 1952, 1956 में ओलिंपिक गोल्ड जीतने वाली टीम का हिस्सा थे। 1956 में तो टीम के कप्तान थे। पkश्री बलबीर ने कहा कि मुझे भी भारत रत्न मिलने की उम्मीद है और वह भी जीते जी। यदि बतौर खिलाडी कप्तान, कोच, मैनेजर मेरे रिकॉर्ड और उपलब्धियां देखें , तो मुझे यह सम्मान मिलना चाहिए लेकिन मै यह भी कहना चाहता हूं कि यह सरकार या ईश्वर की मर्जी पर निर्भर होगा। 90 वर्षीय बलबीर ने भावुक होते हुए कहा कि यह सतयुग नहीं बल्कि कलियुग है।
जब तक आप खुद नहीं कहेंगे, आपकी उपलब्धियां को कोई नहीं सराहेगा। अब खबर यह भी है कि बलबीर की बेटी सुशबीर कौर ने कहा, उन्होंने इतिहास रचा है। मैं चाहती हूं कि नरेंद्र मोदी सरकार उनके साथ इंसाफ करे। व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिये।
फिलहाल ऎसा नहीं है क्योंकि यदि ऎसा होता तो सभी खिला�़डयों के प्रदर्शन की तुलना करके सर्वश्रेष्ठ को चुना जाता। उन्होंने कहा, यदि एक लीजैंड की इस तरह उपेक्षा की जा सकती है तो औसत खिल़ाडी का क्या होगा। उन्होंने कहा, वह पिछले 62 साल से सम्मान का इंतजार कर रहे हैं।
सम्मान और पुरस्कार की बारी आती है तो किसी और को मिल जाता है। मुझे न्याय चाहिये और उम्मीद है कि उनके जीतेजी मिलेगा। बलबीर के करीबी सहयोगी और चंडीगढ हाकी संघ के उपाध्यक्ष एस के गुप्ता ने भी कहा कि बलबीर अधिक सम्मान के हकदार हैं। उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें अभी तक वह सम्मान नहीं मिला जिसके वह हकदार हैं। उन्हें भारत रत्न मिलना चाहिये।






