
फिल्म मस्तराम: पोर्न की देसी खैनी
भारत में पोर्न प्रतिबंधित है और सेक्स के बारे में ल़डकपन से लेकर बुढ़कपन तक सबसे ज्यादा बात इसी पर होती है और भारत में आज सेक्स का सबसे ब़डा मार्केट तैयार हो चुका है। इसी प्रकार एडल्ट सर्टिफिकेट का साथ रिलीज हुई मस्तराम, एक लेखक की कहानी है जोकि सेक्स की किताबें लिखा करता था। लेखक की सभी कहानियां बेशक काल्पनिक होती थीं लेकिन 70-80 के दशक में ये किताबें युवाओं में काफी मशहूर थीं। लेकिन इस फिल्म की रिलीज से पहले ही सेंसर बोर्ड ने फिल्म से कुछ सीन को कट कर दिया है। कहानी: मस्तराम उस दौर की की कहानी है, जब इंटरनेट और हॉट सोशल साइट्स उपलब्ध नहीं थी।
युवा वर्ग से लेकर चालीस-पचास उम्र तक के लोग अपनी सेक्स से जुडी इच्छाओं को पूरा करने के लिए सेक्सी किताबों का सहारा लिया करते थे। हिमाचल के एक छोटे से कस्बे के बैंक में राजाराम (राहुल बग्गा) बाबू हैं, राजाराम का सपना लेखक बनना है, खाली वक्त में राजाराम छोट- छोटी साफ सुथरी कहानियां लिखता। राजाराम की पत्नी रेनू (तारा आलिशा बेरी) भी चाहती हैं राजाराम कामयाब लेखक बने। राजाराम साफ सुथरी कहानियां लिखता है, उसकी लिखी इन कहानियों को छापने के लिए उसे कोई पब्लिशर नहीं मिल रहा। एक दिन एक प्रकाशक उसकी कहानी पब्लिश करने के लिए तैयार हो जाता है, प्रकाशक चाहता है राजाराम अपनी कहानियों में थो़डा बहुत सेक्सी मसाला डाले।
अब राजाराम ऎसी मसाला भरी कहानियों की तलाश में लग जाता है आखिरकार उसे वो मसाला मिल ही जाता है, और उसकी सेक्सी किताबें खूब बिकने लगती हैं। अब नाम और दाम की चाह में राजाराम का एडल्ट और पोर्न किताबें लिखनी शुरू करता है। एक्टिंग: राहुल बग्गा लीड किरदार में हैं और अपने रोल में बस ठीकठाक रहे हैं। राजाराम की पत्नी के किरदार में तारा आलिशा बेरी ने अच्छा काम काम किया है। डायरेक्शन : पौने दो घंटे से भी कम अवधि की फिल्म के साथ भी दर्शकों को बांध ना पाना यकीनन निर्देशन का लचरपन है। कहानी की सुस्त रफ्तार मजा किरकिरा करती है।





