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YOUTH ICON : भाई, सीन पलट दिया! कॉलेज की गलियों से उठकर देश के यूथ मूवमेंट्स का सबसे बड़ा फेस बन चुकी हैं नेहा बोरा
युमना परवीन, उदयपुर
सुनो भई, इंडियन पॉलिटिक्स और स्टूडेंट मूवमेंट्स में अगर आजकल किसी का नाम सबसे ज्यादा बज रहा है, तो वो है नेहा बोरा! दिल्ली यूनिवर्सिटी और JNU के गलियारों से निकली ये बंदी आज देश के यूथ और लेफ्ट मूवमेंट्स का अल्टीमेट चेहरा बन चुकी है।
हाल ही में जंतर-मंतर पर चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR वाले लफड़े में, जब 13 करोड़ वोट कटने पर पूरा सिस्टम हिल गया था, तब अपनी टीम के साथ फ्रंट फुट पर खड़ी थीं नेहा। जुलाई 2026 में नीट पेपर लीक और झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) के पंगे में जब प्रोटेस्ट हुआ, तो रांची में इनके चेहरे पर स्याही तक फेंकी गई। लेकिन मैडम का स्वैग देखो—उन्होंने साफ़ बोल दिया, भाई, इन हरकतों से हमारा गुस्सा दबने वाला नहीं है! दिल्ली के प्रोटेस्ट्स में पैलेट गन और लाठीचार्ज झेल चुकी हूँ, ये सब चिल है।
फैमिली का सीन: बीजेपी समर्थक परिवार और वैचारिक जंग
कहानी में ट्विस्ट ये है कि नेहा जिस परिवार से आती हैं, वहां घरवाले कट्टर बीजेपी सपोर्टर हैं! घर में वैचारिक मतभेद का तगड़ा सीन रहा है। जब वो दिल्ली आईं और पॉलिटिक्स में एक्टिव हुईं, तो घर पर क्लैश होना तो ऑब्वियस था। लेकिन उन्होंने ग्रेजुएशन के सेकेंड-थर्ड ईयर से ही अपनी लाइफ के डिसीजन खुद लेना शुरू कर दिए और आज वो जन आंदोलनों की बेबाक आवाज बन चुकी हैं।
जंतर-मंतर का प्रोटेस्ट : एक नया वाइब
नेहा का मानना है कि जंतर-मंतर के लंबे संघर्ष और भूख हड़ताल ने देश के यूथ को एक अलग ही डायरेक्शन दी है। उनका कहना है कि इस मूवमेंट ने लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ लड़ने के बजाय एक-दूसरे का हाथ थामना सिखा दिया है। प्रोटेस्ट के दौरान जब बीजेपी समर्थक परिवार के बुजुर्ग और पेरेंट्स भी वहां पहुंचे और रोते हुए स्टूडेंट्स से माफी मांगी, तो पूरा नैरेटिव ही बदल गया। कुल मिलाकर सीन ये है कि यूथ पॉलिटिक्स को अभी लंबा सफर तय करना है, और इस रास्ते पर नेहा बोरा जैसे जुझारू चेहरे गेमचेंजर साबित हो रहे हैं!
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