17 साल से जारी परंपराः जालना के विद्यार्थियों ने सीमा पर तैनात जवानों के लिए बनाई इकोफ्रेंडली राखियां

17 साल से जारी परंपराः जालना के विद्यार्थियों ने सीमा पर तैनात जवानों के लिए बनाई इकोफ्रेंडली राखियां


जालाना। देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए महाराष्ट्र के जालना शहर के संस्कार प्रबोधिनी माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने पर्यावरणपूरक राखियां तैयार की हैं। छात्रों द्वारा बनाई गई इन राखियों को डाक के माध्यम से देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों तक भेजा गया है। 

संस्कार प्रबोधिनी माध्यमिक विद्यालय में पिछले 17 वर्षों से सैनिकों के लिए राखियां तैयार करने की यह अनोखी परंपरा जारी है। विद्यालय के उपक्रमशील शिक्षक रामदास कुलकर्णी की प्रेरणा से इस साल भी करीब 150 विद्यार्थियों ने इस पहल में हिस्सा लिया है। 

छात्रों ने कपास, धागे, कपड़े, लकड़ी, ऊन और कागज जैसी पर्यावरणपूरक सामग्री का इस्तेमाल कर आकर्षक राखियां तैयार की हैं। खास बात यह है कि इन राखियों में प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया गया है। सैनिकों के प्रति प्रेम और सम्मान के साथ-साथ विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया है। सीमा पर तैनात कई जवान रक्षाबंधन के मौके पर अपने परिवार से दूर रहते हैं। ऐसे में उन्हें भी रक्षाबंधन का अपनापन महसूस हो, इसी भावना के साथ विद्यार्थियों ने एक राखी देश के नाम, एक राखी सैनिक के नाम की संकल्पना को साकार किया है। 

विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई राखियां मराठा रेजिमेंट, वाघा बॉर्डर और असम रेजिमेंट में तैनात जवानों के लिए डाक के माध्यम से भेजी गई हैं। वहीं, पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए छात्राएं पेड़ों को राखी बांधकर पर्यावरणपूरक रक्षाबंधन भी मनाने वाली हैं। इस पहल के जरिए विद्यार्थियों में देशभक्ति, सैनिकों के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण की भावना को बढ़ावा दिया जा रहा है। पिछले 17 वर्षों से जारी यह उपक्रम अब विद्यालय की एक प्रेरणादायी परंपरा बन चुका है। 

संस्कार प्रबोधिनी सेकेंडरी स्कूल के टीचर रामदास कुलकर्णी ने कहा, संस्कार प्रबोधिनी सेकेंडरी स्कूल में लगभग 150 स्टूडेंट्स ने सैनिकों के लिए राखियां तैयार की हैं। हम इन राखियों को पोस्ट के जरिए उन अलग-अलग कैंपों में भेजेंगे, जहां सैनिक तैनात हैं। इन्हें बनाने में प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया गया है, सिर्फ बायोडिग्रेडेबल मैटीरियल का इस्तेमाल किया गया है। छात्रा संस्कृती शिवतारे ने कहा, यह पर्यावरण से जुड़ी एक पहल है। 

हम सैनिकों के लिए राखियां बना रहे हैं, लेकिन हम प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। हम सिर्फ बायोडिग्रेडेबल (आसानी से नष्ट होने वाली) सामग्री का इस्तेमाल कर रहे हैं। छात्रा सर्वज्ञ शेजुल ने कहा, रामदास कुलकर्णी के नेतृत्व में सैनिकों के लिए राखी बना रहे हैं। सैनिक रक्षाबंधन पर घर नहीं आ सकते हैं, इसलिए हम उन्हें राखियां बनाकर भेजेंगे। हम लोगों ने इकोफ्रेंडली 150 राखियां बनाई हैं। -आईएएनएस

गर्लफ्रैंड बनने के बाद लडकियों में आते हैं ये 10 बदलाव

महिलाओं के ये 6 राज जान चौंक जाएंगे आप

7 कमाल के टिप्स: ऎसे संवारे लडके अपनी त्वचा...



Warning: PHP Startup: Unable to load dynamic library '/opt/cpanel/ea-php54/root/usr/lib64/php/modules/xsl.so' - /lib64/libxslt.so.1: symbol xmlGenericErrorContext, version LIBXML2_2.4.30 not defined in file libxml2.so.2 with link time reference in Unknown on line 0