
खाने की पैकेजिंग पर बने है ये निशान, तो जानिए क्या है इनका मतलब
जब भी हम बाजार से कोई पैकेज्ड फूड खरीदते हैं, तो अक्सर उसका स्वाद, कीमत या ब्रांड देखते हैं, लेकिन पैकेजिंग पर बने छोटे-छोटे निशानों पर ध्यान नहीं देते। ये निशान दिखने में भले ही सामान्य लगें, लेकिन इनके पीछे जरूरी जानकारी छिपी होती है। ये संकेत हमें बताते हैं कि खाना शाकाहारी है या मांसाहारी, उसकी क्वालिटी कैसी है और वह सुरक्षित है या नहीं। इन निशानों को समझकर आप अपने और अपने परिवार की सेहत के लिए बेहतर चुनाव कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि फूड पैकेजिंग पर बने इन चिन्हों का क्या मतलब होता है और इन्हें पहचानना क्यों जरूरी है।
हरा और भूरा निशान क्या बताता है
पैकेजिंग पर बना हरा और भूरा निशान सबसे आम होता है। हरे रंग का निशान बताता है कि उत्पाद पूरी तरह शाकाहारी है, जबकि भूरा या लाल निशान यह दर्शाता है कि उसमें मांसाहारी सामग्री शामिल है। यह जानकारी खासकर उन लोगों के लिए जरूरी होती है, जो अपनी डाइट को लेकर सतर्क रहते हैं।
एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर का महत्व
फूड पैकेजिंग पर FSSAI का लाइसेंस नंबर दिया होता है। यह इस बात का संकेत है कि उत्पाद सरकार द्वारा तय किए गए सुरक्षा मानकों के अनुसार बना है। इस नंबर को देखकर आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि खाना सुरक्षित है।
रिसाइक्लिंग सिंबल का मतलब
पैकेजिंग पर बना त्रिकोण के आकार का रिसाइक्लिंग चिन्ह यह बताता है कि उस पैकेज को दोबारा इस्तेमाल या रिसायकल किया जा सकता है। यह पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद होता है और हमें प्लास्टिक के सही इस्तेमाल के लिए जागरूक करता है।
एक्सपायरी और मैन्युफैक्चरिंग डेट
हर पैकेज्ड फूड पर एक्सपायरी डेट और मैन्युफैक्चरिंग डेट जरूर लिखी होती है। यह बताती है कि उत्पाद कब बना है और कितने समय तक सुरक्षित है। एक्सपायरी डेट के बाद उस खाने का सेवन करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए इसे जरूर चेक करें।
ISI या क्वालिटी मार्क का महत्व
कुछ फूड प्रोडक्ट्स पर ISI या अन्य क्वालिटी मार्क भी दिए होते हैं, जो यह दर्शाते हैं कि उत्पाद ने तय गुणवत्ता मानकों को पूरा किया है। ऐसे निशान भरोसे का संकेत होते हैं और आपको बेहतर क्वालिटी का सामान चुनने में मदद करते हैं।
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