पति-पत्नी के बीच कटाक्ष रोजमर्रा की बात है, लेकिन इसे तकरार का नाम देकर हल्का बना दिया जाता है बिल्कुल बेस्वाद चाय बनाई है तुमने, इतनी बडी हो गई हो, खाना बनाना भी नहीं आता, दिन भर घर में सोती रहती हो, तुम्हारी गलत आदतें ही सीख रहे हैं बच्चे, तुम्हें तो सिर्फ मायका सुहाता है, मेरे घर वालों से क्या लेना देना, चुप रहो, तुम जो कहती हो वो कभी भी नहीं होता, आदि। पति के ये कटाक्ष आम हैं, मगर पत्नी भी कहां बाज आती है, ऑफिस में ऎश करते हो और क्या, तुम्हें तो पैसा उडाने की लगी रहती है, गलत आदतें पाल रखी हैं तुमने, तुम्हें क्या, गुलछर्रे उडाओ जैसे ताने देने में कोई कंजूसी नहीं करती। लडाई बढती है तो हदें पार हो जाती हैं.


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