विधि-विधान संभव ना हो तो

विधि-विधान संभव ना हो तो

यदि आपके लिए श्राद्ध करना संभव ना हो तो घर के बाहर जाकर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके यह प्राथना करे- मेरे पास धन नहीं है। श्राद्ध के लिए उपयुक्त चीजें भी नहीं हैं। परंतु मैं पूर्ण मनोभाव के साथ अपने पितरों को नमस्कार करता हूं। मेरी इस भक्ति से मेरे सभी पितृ संतुष्ट हों। इसलिए मैंने अपने दोनों हाथ हवा की दिशा मे ऊपर फैला दिए हैं। इसके बाद दोनों हाथ हवा की दिशा में ऊपर की ओर करके बगलें झांककर अपनी विवशता बताएं।


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