
मैं अपनी शर्तों पर जीती हूं, सिंगल रहना मेरी पसंद : दिव्या दत्ता
बॉलीवुड डेस्क। मुंबई
अभिनेत्री दिव्या दत्ता पर्दे पर जितने दमदार तरीके से हर एक किरदार को पेश करती हैं, वास्तविक जिंदगी में भी अपनी बेबाकी और सच्चाई से भरी बातों के लिए जानी जाती हैं। इसी कड़ी में दिव्या समाज की पुरानी और पितृसत्तात्मक सोच पर खुलकर बात करती नजर आईं।
दिव्या ने सिंगल रहने, शादी और मातृत्व को लेकर समाज की अपेक्षाओं पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी इंसान की जिंदगी को एक ही तराजू में नहीं तोला जा सकता और हर किसी की कहानी अलग-अलग होती है।
दिव्या से जब पूछा गया कि आज के समय में सिंगल रहना कितना मुश्किल है और क्या समाज अब भी मानता है कि कोई महिला शादी या बच्चे होने से ही पूरी होती है, तो उन्होंने अपनी राय रखते हुए बताया, चाहे मेरे पास पार्टनर हो या मैं सिंगल हूं, मैं अपनी जिंदगी का मजा लेती हूं और यही सबसे ज्यादा मायने रखता है।
मुझे लगता है कि हर इंसान की कहानी अलग होती है। यह आम राय बनाना कि पार्टनर होना अच्छा है या सिंगल रहना अच्छा है, यह किसी के लिए भी सही नहीं। जो आपके लिए सही काम करता है, वही सबसे बढ़िया है। मेरे लिए यह सही है और मैं इससे खुश हूं।
उन्होंने आगे कहा, मेरा स्पष्ट मानना है कि लोगों को दूसरों की जिंदगी के फैसलों पर राय नहीं बनानी चाहिए। अगर किसी को अच्छा पार्टनर मिल गया, तो उनके लिए सही है। अगर नहीं मिला, तो उन्हें जो सही लगे, वही करना चाहिए।
आप किसी की जिंदगी को एक ही तराजू में नहीं तोल सकते। मेरी जिंदगी ऐसी ही रही है और मैं इसका मजा लेती हूं। इसलिए जो भी फैसले मैंने लिए, उन पर मुझे गर्व है।
समाज में आज भी मौजूद पितृसत्तात्मक सोच पर बात करते हुए दिव्या ने कहा, तरक्की के बावजूद ये पुरानी सोच बनी हुई है। शिक्षा का इससे कोई लेना-देना नहीं, यह बस एक सोच है। हर इंसान का सफर अलग होता है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए, न कि तुलना।
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