फेड की सख्त नीति और पश्चिम एशिया तनाव के चलते सोने-चांदी की कीमतों में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट

फेड की सख्त नीति और पश्चिम एशिया तनाव के चलते सोने-चांदी की कीमतों में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट


बिजनेस डेस्क। मुंबई 

हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) और वैश्विक बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंकाओं ने निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी से दूर कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो सोना अक्टूबर 2008 के बाद अपनी सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज कर सकता है। 

घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर मंगलवार को कारोबार की शुरुआत से ही कीमती धातुओं पर दबाव दिखाई दिया। अगस्त डिलीवरी वाला सोना आज अपने पिछले बंद 1,42,402 रुपए से 1,516 रुपए यानी 1 प्रतिशत गिरकर 1,40,886 प्रति 10 ग्राम पर खुला। वहीं दिन के कारोबार में यह 1.37 प्रतिशत यानी 1,952 रुपए गिरकर 1,40,450 रुपए के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी हुई और खबर लिखे जाने तक इसमें 0.15 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। 

वहीं, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी की बात करें तो यह आज अपने पिछले बंद 2,22,634 रुपए से 1 प्रतिशत यानी 2,387 रुपए गिरकर 2,20,247 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुला और यही दिन का निम्नतम स्तर रहा। हालांकि बाद के कारोबार में इसमें भी मामूली बढ़त दर्ज की गई और खबर लिखे जाने तक इसमें 0.12 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। स्पॉट गोल्ड करीब 1.5 प्रतिशत टूटकर 3,956.92 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। जून महीने में अब तक सोने की कीमत लगभग 12.7 प्रतिशत गिर चुकी है और यह लगातार चौथे महीने कमजोरी की ओर बढ़ रहा है। इसी तरह स्पॉट सिल्वर 2 प्रतिशत गिरकर 57.13 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। प्लेटिनम 1.1 प्रतिशत और पैलेडियम 0.4 प्रतिशत कमजोर हुआ। ये तीनों कीमती धातुएं भी इस महीने और पूरी तिमाही में गिरावट दर्ज करने की ओर अग्रसर हैं। 

विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हुई है। यही वजह है कि बाजार को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए आगे भी ब्याज दरें बढ़ा सकता है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर डॉलर को मजबूत बनाती हैं और सोने जैसी बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों की मांग घटा देती हैं। इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। 

निवेशकों की निगाहें अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हैं। हालांकि सप्ताहांत में दोनों देशों के बीच हुए मिसाइल हमलों ने संघर्ष विराम की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है। अगस्त डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड वायदा 1.03 प्रतिशत गिरकर 72.40 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि सितंबर अनुबंध 73.51 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। 

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और इस सप्ताह जारी होने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। विशेष रूप से अमेरिका के गैर-कृषि रोजगार, बेरोजगारी दर, विनिर्माण और सेवा पीएमआई तथा यूरोजोन के मुद्रास्फीति आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। --आईएएनएस

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