दुर्गा ई-ऑटो योजना से महिलाओं और ट्रांसजेंडर्स को मिलेगा सम्मानजनक रोजगार: रेखा गुप्ता

दुर्गा ई-ऑटो योजना से महिलाओं और ट्रांसजेंडर्स को मिलेगा सम्मानजनक रोजगार: रेखा गुप्ता


पॉलिटिकल डेस्क। नई दिल्ली 

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को दिल्ली सचिवालय में दुर्गा (ड्राइविंग, अपलिफ्टमेंट एंड रोजगार फॉर वुमेन/ट्रांसजेंडर ई-ऑटो) योजना का डिजिटल पोर्टल लॉन्च किया। इस योजना के माध्यम से महिलाओं और ट्रांसजेंडर्स को इलेक्ट्रिक ऑटो का मालिक और चालक बनकर सम्मानजनक स्वरोजगार हासिल करने का अवसर मिलेगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं और ट्रांसजेंडर्स को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उन्हें सुरक्षित परिवहन से जोड़ना दिल्ली सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। ‘दुर्गा’ योजना इसी दिशा में अहम पहल है। इसके अंतर्गत महिलाएं और ट्रांसजेंडर इलेक्ट्रिक पिंक ऑटो के मालिक और चालक बन सकेंगे। इससे उन्हें सम्मानजनक स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का अवसर मिलेगा। इस अवसर पर दिल्ली के परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह समेत वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 

मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के पहले चरण में कुल 1,300 गुलाबी ई-ऑटो आवंटित किए जाएंगे। इनमें 1,170 ई-ऑटो महिलाओं और 130 ई-ऑटो ट्रांसजेंडर्स के लिए निर्धारित किए गए हैं। महिलाओं के लिए प्रति राजस्व जिले में अधिकतम 90 और ट्रांसजेंडर्स के लिए अधिकतम 10 ई-ऑटो का कोटा निर्धारित किया गया है। इस प्रकार योजना के माध्यम से लक्षित वर्गों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ सार्वजनिक परिवहन में उनकी भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि योजना को पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से लागू करने के लिए समर्पित डिजिटल पोर्टल विकसित किया गया है। आवेदन प्रक्रिया योजना की मंजूरी के बाद तीन महीने तक खुली रहेगी। यदि पोर्टल बंद होने के बाद किसी जिले में अंतिम रूप से प्राप्त पात्र आवेदनों की संख्या निर्धारित कोटे से अधिक होती है तो ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से आवंटन किया जाएगा और इसके बाद पात्र लाभार्थियों को आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी किए जाएंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। 

उन्होंने जानकारी दी कि योजना का लाभ लेने के लिए महिला आवेदकों की आयु 20 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए और वे दिल्ली की निवासी हों। उनके पास वैध हल्के मोटर वाहन (एलएमवी) का ड्राइविंग लाइसेंस और सार्वजनिक सेवा वाहन (पीएसवी) बैज होना आवश्यक है। परिवार की वार्षिक आय पांच लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए और अधिकतम तीन जीवित बच्चों से संबंधित निर्धारित शर्त भी लागू होगी। ट्रांसजेंडर आवेदकों के लिए भी आयु, दिल्ली में निवास और वैध ड्राइविंग लाइसेंस और पीएसवी बैज संबंधी शर्तें निर्धारित की गई हैं। 

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि सरकार का प्रयास है कि महिला कॉलेजों के आसपास भी दुर्गा ई-ऑटो के लिए स्टैंड बनाए जाएं, जिससे छात्राओं और अन्य महिला यात्रियों को आवागमन में सुविधा मिल सके। इसके अतिरिक्त दिल्ली मेट्रो व एनसीआरटीसी से नमो भारत आरआरटीएस तथा मेट्रो स्टेशनों पर दुर्गा ई-ऑटो के लिए समर्पित पार्किंग और चार्जिंग स्थान उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। योजना के क्रियान्वयन में दिल्ली पुलिस, नगर निगम और संबंधित परिवहन संस्थाओं के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण होगा। 

उन्होंने कहा कि दुर्गा योजना का प्रभाव केवल 1,300 ई-ऑटो के संचालन तक सीमित नहीं रहेगा। इससे स्थानीय मरम्मत कार्यशालाओं, वाहन सर्विसिंग, चार्जिंग सेवाओं, बैटरी रीसाइक्लिंग और रखरखाव जैसे सहायक क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। यह पहल महिलाओं और ट्रांसजेंडर्स की आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के साथ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती देगी। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों की आजीविका और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में होने वाले बदलावों का आकलन दो चरणों में किया जाएगा, ताकि इसके वास्तविक प्रभावों को समझकर आगे की व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाया जा सके। 

दिल्ली के परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि योजना के लाभार्थी दिल्ली की लागू ईवी नीति-2026 के अंतर्गत निर्धारित खरीद प्रोत्साहनों का लाभ भी उठा सकेंगे। इसके अलावा, उबर, ओला, भारत टैक्सी और रैपिडो जैसे एग्रीगेटर्स से दुर्गा ई-ऑटो चालकों को छह महीने तक निःशुल्क ऑनबोर्डिंग और सब्सक्रिप्शन उपलब्ध कराने के लिए कहा जाएगा। इससे लाभार्थियों को अपने ई-ऑटो के संचालन और यात्रियों तक पहुंच बनाने में सहायता मिल सकेगी। 

दुर्गा ई-ऑटो योजना महिलाओं और ट्रांसजेंडर्स को रोजगार, सम्मान और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के साथ दिल्ली में सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने का प्रयास है। सरकार का लक्ष्य है कि पारदर्शी आवंटन, बेहतर बुनियादी सुविधाओं और संबंधित संस्थाओं के समन्वय के माध्यम से इस पहल को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारा जाए। -आईएएनएस

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