6 साल के निचले स्तर पर आए कच्चे तेल के दाम

6 साल के निचले स्तर पर आए कच्चे तेल के दाम

सिंगापुर। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंगलवार को कच्चे तेल के दाम पिछले 6 साल के निचले स्तर पर आ गए। वजह यह रही कि अमेरिका में शेल तेल का उत्पादन लगातार बढ रहा है और पेट्रोलियम उत्पादक देशों के संगठन ओपेक किसी भी सूरत में उत्पादन घटाने के लिए तैयार नहीं है। ब्रेंट क्रूड का फरवरी सौदा करीब-करीब 5 प्रतिशत गिरावट के साथ 45.23 डॉलर प्रति बैरल रह गया। यह मार्च, 2009 के बाद सबसे कम भाव है। यूएस कू्रड का फरवरी सौदा भी 44.44 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया, जो अप्रैल 2009 के बाद सबसे कम भाव है। जून, 2014 में कच्चे तेल की कीमतें अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थीं।

तब से लेकर अब तक इसके भाव में 60 प्रतिशत गिरावट आ चुकी है। पिछले 7 हफ्तों के दौरान कच्चे तेल के दाम 36 प्रतिशत से ज्यादा घटे हैं। दरअसल, कच्चे तेल के बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने का खेल चल रहा है। इस बाजार में अमेरिका की दखल बढ गई, जो पहले कच्चे तेल का सबसे बडा आयातक था। यही वजह है कि ओपेक के सदस्य देश कीमतों में लगातार गिरावट थामने के लिए उत्पादन घटाने के बजाए ग्राहकों को डिस्काउंट की पेशकश कर रहे हैं।

संयुक्त अरब अमीरात के तेल मंत्री सोहेल बिन मोहम्मद ने कहा कि नवंबर में ओपेक ने उत्पादन नहीं घटाने का बिलकुल सही फैसला किया था। उन्होंने यह भी कहा कि ग्लोबल मार्केट में जो कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ी है, उसमें अमेरिकी शेल गैस की अहम भूमिका रही है। क्रूड ऑइल मार्केट पर दबाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दिसंबर के दौरान चीन में कच्चे तेल का आयात बढा है।

इस दौरान वहां पहली बार रोजाना 70 लाख बैरल से ज्यादा कच्चे तेल का आयात किया गया। कच्चे तेल की सबसे ज्यादा खपत करने के मामले में चीन दूसरे पायदान पर है। वहां की सरकार कम कीमतों का फायदा उठाते हुए रिजर्व बढाना की रणनीति पर चल रही है। बावजूद इसके कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नहीं थमीं।


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