
स्वतंत्रता विरोधी ताकतें 1971 के आदर्शों को मिटाने की साजिश कर रहीं हैं : शेख हसीना
ढाका। बांग्लादेश गुरुवार को अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। ऐसे में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आरोप लगाया कि घरेलू और विदेशी साजिशों से समर्थन प्राप्त स्वतंत्रता-विरोधी ताकतें पाकिस्तान के खिलाफ देश के 1971 के मुक्ति संग्राम के आदर्शों को मिटाने की कोशिश कर रही हैं।
शेख हसीना के एक बयान को अवामी लीग ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा, आज देश एक कठिन और चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रहा है। कई बाधाओं को पार कर देश को समृद्धि की ओर ले जाने के बाद, कुछ स्वतंत्रता-विरोधी शक्तियां एक बार फिर हमारी सभी उपलब्धियों को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ने कभी अन्याय के आगे सिर नहीं झुकाया। जैसे 1971 में राष्ट्रपिता के नेतृत्व में बंगाल के लोग अवामी लीग के नेतृत्व में एकजुट हुए और मुक्ति संग्राम में बहादुरी से लड़कर विजय हासिल की, वैसे ही बंगाल के लोग एक बार फिर उसी भावना और देशभक्ति के साथ उठ खड़े होंगे। कोई भी साजिश हमें चुप नहीं करा सकती। लोग फिर से एकजुट होंगे, साजिशों के जाल को तोड़ेंगे और एक बार फिर विजय प्राप्त करेंगे।
स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, देश 26 मार्च को स्वतंत्रता दिवस और राष्ट्रीय दिवस के रूप में उन स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में मनाता है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। स्वतंत्रता के लिए सशस्त्र संघर्ष 26 मार्च 1971 की सुबह शुरू हुआ, जब 25 मार्च 1971 की रात पाकिस्तानी सेना की ओर से निहत्थे बांग्लादेशियों पर क्रूर कार्रवाई की गई थी। इस रात को नरसंहार दिवस कहा जाता है।
अपने पिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की विरासत को याद करते हुए, हसीना ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनके अदम्य नेतृत्व में बांग्लादेश ने स्वतंत्रता प्राप्त की। उन्होंने चार राष्ट्रीय नेताओं, मुक्ति संग्राम के अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं, तीन मिलियन शहीदों, सभी स्तरों के आयोजकों और उन असंख्य महिलाओं को भी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने पाकिस्तानी अत्याचारों का सामना किया।
26 मार्च 1971 को बंगबंधु के कथन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, यह मेरा आखिरी संदेश हो सकता है। आज से बांग्लादेश स्वतंत्र है। मेरा बांग्लादेश के लोगों से आह्वान है, जहां भी आप हैं, जो कुछ भी आपके पास है, अपनी पूरी ताकत से कब्जा करने वाली ताकतों का विरोध करें। लड़ाई तब तक जारी रखें, जब तक पाकिस्तानी कब्जे वाली सेना का अंतिम सैनिक बंगाल की धरती से बाहर नहीं निकाल दिया जाता और अंतिम विजय प्राप्त नहीं हो जाती।
हसीना ने कहा कि 26 मार्च 1971 की सुबह इस संदेश के प्रसारण ने ही बांग्लादेश के जन्म की घोषणा की थी। इस ऐतिहासिक महान स्वतंत्रता और राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर, मैं देश के लोगों और विदेश में रह रहे सभी बांग्लादेशियों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई देती हूं। -आईएएनएस
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