बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और सख्त करेगा ईरान के खिलाफ एनर्जी बैन

बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और सख्त करेगा ईरान के खिलाफ एनर्जी बैन

वॉशिंगटन। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान के ऊर्जा क्षेत्र पर बैन को और कड़ा करने के लिए बड़ा कानून पास किया है। तेहरान के साथ चल रहे तनाव के बीच दोनों पार्टियों के प्रतिनिधियों ने और कड़े कदम उठाने पर जोर दिया। इस नए कानून का नाम एन्हांस्ड ईरान सैंक्शन्स एक्ट है, जो सीनेट में ध्वनिमत से पास हो गया। इससे ईरान के तेल व्यापार और उसके ग्लोबल नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने के लिए दोनों पार्टियों का बड़ा समर्थन दिखा। 

वोट के बाद एक बयान में कांग्रेसी माइक लॉलर ने कहा, इस जरूरी कानून का मकसद ईरान के गैरकानूनी तेल व्यापार को बढ़ावा देने वाली विदेशी कंपनियों पर अमेरिका के बैन सिस्टम को और मजबूत करना है। इस बिल को 295 सदस्यों ने को-स्पॉन्सर किया था—171 रिपब्लिकन और 124 डेमोक्रेट। यह कदम राष्ट्रपति को उन विदेशी कंपनियों पर बैन लगाने का अधिकार देगा जो ईरान से तेल, कंडेनसेट या दूसरे पेट्रोलियम या पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट की प्रोसेसिंग, रिफाइनिंग, एक्सपोर्ट, ट्रांसफर या बिक्री से जुड़े या उससे जुड़े किसी भी बड़े ट्रांजैक्शन में शामिल हैं। 

लॉलर ने इस बिल को ईरान की क्षेत्रीय गतिविधियों और वित्तीय नेटवर्क पर रोक लगाने की एक बड़ी कोशिश के हिस्से के तौर पर बनाया। उन्होंने कहा, अमेरिका ईरानी सरकार को बैन से बचने और गैर-कानूनी तेल बेचकर आतंकवाद को पैसे देने की इजाजत नहीं देगा। उन्होंने कहा, बहुत लंबे समय से, ईरान बैन किए गए तेल को लाने-ले जाने के लिए विदेशी बैंकों, बीमा कंपनियों और लॉजिस्टिक्स प्रोवाइडर्स के नेटवर्क पर निर्भर रहा है। 

यह कानून उस पूरे नेटवर्क को टारगेट करता है और यह पक्का करता है कि आतंकवाद के सबसे बड़े सरकारी स्पॉन्सर को फाइनेंस करने वालों को असली नतीजे भुगतने पड़ें। लॉलर ने कहा कि यह बिल सरकार को ईरान पर ज्यादा से ज्यादा दबाव डालने की इजाजत देगा। उन्होंने आगे कहा कि यह ईरान के गैर-कानूनी तेल व्यापार को बढ़ावा देने वालों, जिन्होंने उनके प्रॉक्सी को फंडिंग किया है, जिन्होंने उनके मिसाइल प्रोग्राम की फंडिंग की है, जिन्होंने उनके न्यूक्लियर लक्ष्यों और उनके यूरेनियम संवर्धन को फंडिंग की है पर बैन लगाने में मदद करेगा। यह कानून खास तौर पर तेल सप्लाई चेन में शामिल कई तरह के लोगों को टारगेट करता है। 

लॉलर ने कहा, इसमें असल में कोई भी कंपनी शामिल है जिसने ईरानी तेल की प्रोसेसिंग, रिफाइनिंग, एक्सपोर्ट या ट्रांसफर से जुड़े किसी ट्रांजैक्शन में हिस्सा लिया हो। इसमें विदेशी बैंक, वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियां, फ्लैगिंग रजिस्ट्री और भी बहुत कुछ शामिल हैं। बिल के तहत पाबंदियों में अमेरिका में प्रॉपर्टी के लेन-देन को रोकना और ऐसी गतिविधियों से जुड़े लोगों को वीजा देने से मना करना शामिल हो सकता है। हालांकि, कानून के अंतिम रूप में एक जरूरी बदलाव शामिल है। यह राष्ट्रपति को पाबंदियां लगाने का अधिकार देता है। 

कांग्रेसी जॉर्ज लैटिमर ने इस बदलाव को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि यह सरकार के कहने पर किया गया था। बिल अब सीनेट में जाएगा, जहां एक संबंधित कानून पेश किया गया है, लेकिन अभी तक विदेश संबंध समिति ने इसे नहीं लिया है। बिल में लिखे गए शब्दों के अनुसार, इस उपाय का मकसद इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान से तेल, गैस, लिक्विफाइड नेचुरल गैस और उससे जुड़े पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स से जुड़े लॉजिस्टिकल लेन-देन में शामिल लोगों पर पाबंदियां लगाना है। इसमें प्रॉपर्टी को रोकने, वीजा पर रोक लगाने और लागू करने में तालमेल बिठाने के लिए एक इंटर-एजेंसी वर्किंग समूह बनाने के नियम भी बताए गए हैं। -आईएएनएस

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