
घर में आसानी से लगा सकते हैं बेलपत्र का पौधा, इन बातों का रखें खास ध्यान
घर में पौधे लगाना केवल हरियाली बढ़ाने का तरीका नहीं है, बल्कि इससे घर का वातावरण भी खूबसूरत और ताजगी भरा नजर आता है। धार्मिक दृष्टि से भी कुछ पौधों को विशेष महत्व दिया जाता है, जिनमें बेलपत्र का पौधा प्रमुख है। भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए कई लोग इसे अपने घर में लगाना शुभ मानते हैं। अगर आपके पास बड़ा बगीचा नहीं है, तब भी गमले में बेल का पौधा लगाया जा सकता है। हालांकि पौधा लगाने के साथ उसकी सही जगह, मिट्टी, पानी और धूप का ध्यान रखना भी जरूरी है। बेल का पौधा सामान्य तौर पर देखभाल में ज्यादा मुश्किल नहीं होता, लेकिन शुरुआत में कुछ बातों का ध्यान रखने से इसकी ग्रोथ बेहतर हो सकती है।
सही गमले और मिट्टी का करें चुनाव
अगर आप घर की बालकनी या छत पर बेल का पौधा लगाना चाहते हैं, तो शुरुआत में ऐसा गमला चुनें जिसमें नीचे पानी निकलने के लिए पर्याप्त छेद हों। बेल का पौधा आगे चलकर बड़ा हो सकता है, इसलिए समय के साथ इसे बड़े गमले में शिफ्ट करना जरूरी पड़ सकता है। मिट्टी ऐसी रखें जिसमें पानी जमा न हो। सामान्य गार्डन मिट्टी में थोड़ी रेत और अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद मिलाई जा सकती है। मिट्टी बहुत ज्यादा चिकनी और पानी रोकने वाली न हो, इसका ध्यान रखें।
पौधे को पर्याप्त धूप मिलना जरूरी
बेल का पौधा धूप पसंद करता है। इसलिए इसे ऐसी जगह रखें जहां रोजाना कई घंटे अच्छी प्राकृतिक रोशनी मिल सके। बालकनी, छत या घर का ऐसा खुला हिस्सा इसके लिए बेहतर हो सकता है जहां पर्याप्त धूप आती हो। हालांकि बहुत छोटे पौधे को तेज गर्मी में अचानक लंबे समय तक कड़ी धूप में रखने के बजाय धीरे-धीरे धूप की आदत डालना बेहतर है। अच्छी रोशनी मिलने पर पौधे की पत्तियां और नई शाखाएं बेहतर तरीके से विकसित हो सकती हैं।
पानी देते समय न करें ज्यादा जल्दबाजी
बेल के पौधे को जरूरत से ज्यादा पानी देना इसकी जड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। मिट्टी की ऊपरी सतह सूखी महसूस होने पर ही पानी दें और गमले में पानी जमा न होने दें। मानसून में खास सावधानी रखें, क्योंकि बारिश के कारण मिट्टी पहले से ही गीली हो सकती है। ऐसे समय अतिरिक्त पानी देने से जड़ों में सड़न का खतरा बढ़ सकता है। मौसम, गमले के आकार और मिट्टी की नमी देखकर पानी की मात्रा तय करें।
समय-समय पर करें पौधे की देखभाल
पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए सूखी या पीली पत्तियों को समय-समय पर हटाते रहें। कुछ समय के अंतराल पर मिट्टी को हल्का ढीला कर सकते हैं, ताकि जड़ों तक हवा पहुंचती रहे। जरूरत के अनुसार जैविक खाद भी दी जा सकती है। अगर पौधे की पत्तियों पर कीड़े या बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो समस्या की पहचान करके उचित पौध संरक्षण उपाय अपनाएं। बेलपत्र का पौधा धार्मिक आस्था से जुड़ा जरूर है, लेकिन इसकी देखभाल भी किसी अन्य पौधे की तरह ही करनी चाहिए। सही धूप, अच्छी जल निकासी, संतुलित पानी और नियमित देखभाल के साथ इसे घर की हरियाली का खूबसूरत हिस्सा बनाया जा सकता है।
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