
परफेक्ट पेरेंटिंग का जुनून बच्चों के लिए क्यों बन रहा है मानसिक बोझ
आज के दौर में हर माता पिता अपने बच्चे को सबसे बेहतर बनाना चाहते हैं लेकिन अच्छे माता पिता बनने की यह चाहत जब परफेक्ट बनने की जिद में बदल जाती है तो इसका सीधा असर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है । सोशल मीडिया की चमक धमक और समाज का दबाव पेरेंट्स को एक ऐसी रेस में शामिल कर देता है जहां बच्चा सिर्फ एक माध्यम बनकर रह जाता है।
पेरेंटिंग के इस दबाव के मुख्य कारण और बिंदु
हर समय बेहतर करने की उम्मीद
जब बच्चों से लगातार उम्मीद की जाती है कि वे हर काम में सबसे आगे रहें तो वे अपनी छोटी खुशियों को जीना भूल जाते हैं। उन्हें लगने लगता है कि वे कभी भी अपने माता पिता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाएंगे। जिससे उनके अंदर निराशा घर करने लगती है।
गलती करने का डर
जब माता पिता गलतियों को स्वीकार करने के बजाय उन पर नाराजगी जाहिर करते हैं। तो बच्चा नई चीजें सीखने से डरने लगता है । उसे लगता है कि फेल होने पर उसे अपमानित होना पड़ेगा और यही डर उसे जीवन में जोखिम लेने से रोकता है।
दूसरों से तुलना करना
जब किसी बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों की उपलब्धियों से की जाती है । तो यह उसके आत्मसम्मान को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाता है । उसे लगने लगता है कि उसकी अपनी कोई अलग पहचान नहीं है और वह जैसा है वैसा काफी नहीं है।
भावनाओं के बजाय नतीजों पर ध्यान देना
अक्सर पेरेंट्स सिर्फ बच्चे के ग्रेड और रिजल्ट पर ध्यान देते हैं और उसकी मानसिक स्थिति या मन की बात को नजरअंदाज कर देते हैं । इससे बच्चा धीरे धीरे अपनी परेशानियों को खुद तक सीमित रखने लगता है और अकेला पड़ जाता है।
प्यार को सफलता के तराजू में तौलना
अगर बच्चे को यह महसूस होने लगे कि उसे प्यार और सम्मान तभी मिलेगा जब वह सफल होगा तो वह हमेशा एक मानसिक तनाव में रहता है। उसे लगता है कि उसकी अहमियत केवल उसकी जीत और मेडल तक ही सीमित है।
बच्चों के भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव
लंबे समय तक इस तरह के दबाव में रहने वाले बच्चे बड़े होकर आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं । उनमें निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है और वे अक्सर घबराहट और चिंता जैसी समस्याओं से घिरे रहते हैं । रिश्तों में भी वे अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते हैं।
पेरेंटिंग का असली मकसद बच्चे को एक सुरक्षित और खुशहाल माहौल देना है न कि उसे हर समय दूसरों से बेहतर साबित करना बच्चे को उसकी अपनी रफ्तार से बढ़ने देना ही उसके मानसिक विकास के लिए सबसे जरूरी है।
हेमलता शर्मा जयपुर
#5 कमाल के लाभ बाई करवट सोने के...






