कम्युनिकेशन का लाइफ में हर जगह महत्व

कम्युनिकेशन का लाइफ में हर जगह महत्व

पॉजिटिव कम्युनिकेशन की बात की जाए तब कार्यालय में देरी से आने वाले कर्मचारी को इस बात के लिए प्रेरित किया जाए कि चलिए आज कोई समस्या होगी बावजूद इसके आप थो़डा ही देर से आए। आप कल और जल्दी आ सकते हैं। हो सकता है कि इससे कर्मचारी के मन पर थो़डा असर प़डे और वह जल्दी आने के लिए प्रेरित हो, जबकि दूसरी ओर अगर आपने उसे डांटा है तब उसका नकारात्मक असर ही प़डेगा। वह ऑफि स में जल्दी जरूरी आएगा, पर अपना आउटपुट जैसा चाहिए वैसा नहीं देगा। घर पर भी युवाओं या किशोरों से बातचीत के दौरान या सामान्य रूप से बातचीत के दौरान भी अगर आप किसी विवाद को समाप्त करना चाहते हैं तब बातचीत की शुरूआत जिन मुद्दों पर असहमति है उनसे न करके जिन बातों पर सहमति है, उससे करेंगे तब बात बनेगी जरूर। कॉर्पोरेट वल्र्ड में किसी भी उत्पाद या किसी अन्य कंपनी से डील करते वक्त इस बात का ध्यान रखा जाता है। दोनों साझा रूप से किन बातों पर सहमत हैं। एक बार हां की मुहर लग जाने के बाद अन्य बातें करने में आसानी हो जाती है।


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