Parenting Tips: बच्चे की हर बात मानना नहीं, सही समय पर सही सीख देना है असली पैरेंटिंग

Parenting Tips: बच्चे की हर बात मानना नहीं, सही समय पर सही सीख देना है असली पैरेंटिंग

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा खुश रहे, आत्मविश्वासी बने और जिंदगी में आगे बढ़े। इसी चाहत में कई बार पेरेंट्स बच्चे की हर जरूरत पूरी करने और उसकी हर जिद मानने लगते हैं। लेकिन अच्छी पैरेंटिंग का मतलब सिर्फ बच्चे को खुश रखना नहीं है, बल्कि उसे सही और गलत का फर्क समझाना भी है। बचपन में मिली आदतें और सीख बच्चे के व्यवहार और सोच पर लंबे समय तक असर डाल सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता बच्चे पर हर समय रोक-टोक करने के बजाय उसके साथ ऐसा रिश्ता बनाएं, जहां वह अपनी बात खुलकर कह सके। प्यार के साथ नियम और आजादी के साथ जिम्मेदारी का संतुलन बच्चे के विकास में मदद कर सकता है।
बच्चे की बात सुनना भी है जरूरी
कई बार माता-पिता बच्चे को सिर्फ निर्देश देते रहते हैं—यह करो, वह मत करो, जल्दी पढ़ो या मोबाइल बंद करो। लेकिन बच्चे की बात सुनना भी उतना ही जरूरी है। अगर बच्चा किसी बात को लेकर परेशान है, स्कूल में कुछ हुआ है या वह कोई सवाल पूछ रहा है, तो उसे ध्यान से सुनें। हर बात का जवाब तुरंत डांट से देने की बजाय पहले उसकी सोच समझने की कोशिश करें। जब बच्चे को लगता है कि घर में उसकी बात सुनी जाती है, तो वह अपनी परेशानियां छिपाने के बजाय माता-पिता से साझा करने में ज्यादा सहज महसूस कर सकता है।
हर जिद पूरी करना जरूरी नहीं
बच्चे को प्यार करना और उसकी हर जिद मान लेना, दोनों अलग बातें हैं। अगर बच्चा हर बार रोकर या जिद करके अपनी बात मनवा लेता है, तो धीरे-धीरे वह हर स्थिति में यही तरीका अपनाने लग सकता है। इसलिए जरूरी है कि पेरेंट्स प्यार से लेकिन साफ तरीके से कुछ सीमाएं तय करें। अगर किसी चीज के लिए मना करना जरूरी है, तो केवल “नहीं” कहने के बजाय बच्चे को उसकी वजह भी समझाएं। इससे वह धीरे-धीरे नियमों और जिम्मेदारियों को समझना सीख सकता है।
तुलना करने से बचें
“देखो, शर्मा जी का बेटा कितना अच्छा पढ़ता है” या “तुम अपनी बहन जैसे क्यों नहीं हो?” जैसी बातें बच्चे के मन पर असर डाल सकती हैं। हर बच्चे की अपनी क्षमता, रुचि और सीखने की गति होती है। बार-बार तुलना करने के बजाय उसके छोटे-छोटे प्रयासों को पहचानें। अगर बच्चा किसी काम में कमजोर है, तो उसे शर्मिंदा करने की जगह सुधारने में मदद करें। तारीफ केवल नतीजे की नहीं, बल्कि उसकी मेहनत और कोशिश की भी करें। इससे बच्चे को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल सकती है।
गलती करने का मौका भी दें
बच्चे को हर परेशानी से बचाने की कोशिश करना हमेशा सही नहीं होता। उम्र और स्थिति के अनुसार उसे छोटे फैसले लेने और गलतियों से सीखने का मौका भी मिलना चाहिए। अगर वह कोई गलती करता है, तो तुरंत उसे निकम्मा या लापरवाह कहने की बजाय समझाएं कि अगली बार वह क्या बेहतर कर सकता है। हर गलती पर बहुत ज्यादा डांट बच्चे को डरपोक या अपनी बातें छिपाने वाला बना सकती है। सही मार्गदर्शन के साथ उसे अनुभव से सीखने दें।
खुद बनें बच्चे के लिए उदाहरण
बच्चे अक्सर माता-पिता की बातों से ज्यादा उनके व्यवहार को देखते और सीखते हैं। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि बच्चा सम्मान से बात करे, समय का ध्यान रखे और गलतियों को स्वीकार करे, तो इन आदतों को अपने व्यवहार में भी दिखाएं। अच्छी पैरेंटिंग का मतलब परफेक्ट माता-पिता बनना नहीं है, बल्कि हर दिन बच्चे के साथ सीखते हुए उसे प्यार, भरोसा और सही दिशा देना है।

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