
बच्चों के मन में बढ़ती ईर्ष्या को कैसे बदलें सकारात्मकता में जानिए परवरिश के खास सूत्र
छोटे बच्चों के मन में पनपने वाली जलन और नफरत की भावना जन्मजात नहीं होती। बाल मनोविज्ञान के अनुसार बच्चों का व्यवहार उनके आसपास के परिवेश और पारिवारिक अनुभवों से आकार लेता है। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए तो बच्चे छोटी बातों पर चिढ़ने लगते हैं। माता पिता थोड़ा सा बदलाव करके बच्चों के भीतर प्रेम और सहानुभूति के भाव जगा सकते हैं।
बच्चों की तुलना दूसरों से न करें
अक्सर माता पिता बच्चों की तुलना उनके दोस्तों या भाई बहनों से करने लगते हैं। ऐसा करने से बच्चे के मन में हीन भावना आती है। बच्चे की तुलना केवल उसकी अपनी पुरानी आदतों और सुधार से की जानी चाहिए।
संवाद का मार्ग खुला रखें
बच्चे जब अपनी बातें खुलकर कहते हैं तो उनका मानसिक तनाव कम होता है। उनकी छोटी बातों को भी ध्यान से सुनना चाहिए। उन्हें अपनी भावनाएं सही तरीके से व्यक्त करने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।
घर में सकारात्मक माहौल बनाएं
बच्चे बड़ों के आचरण को बहुत जल्दी सीखते हैं। घर में आपस में प्रेम और सम्मान का वातावरण होना आवश्यक है। बड़ों का अच्छा व्यवहार देखकर बच्चे स्वयं संवेदनशील बनते हैं।
डिजिटल सामग्री पर नजर रखें
आजकल बच्चे टीवी और मोबाइल के जरिए बहुत सी बातें सीखते हैं। उनके सामने केवल प्रेरणादायक और उनकी आयु के अनुकूल सामग्री ही होनी चाहिए। नकारात्मक या हिंसक सामग्री उनके व्यवहार को प्रभावित करती है।
भावनात्मक समर्थन और प्रोत्साहन दें
बच्चे के अच्छे काम की सराहना करना बहुत जरूरी है। जब बच्चे को पर्याप्त ध्यान और स्नेह मिलता है तो उसके मन में असुरक्षा की भावना पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
हेमलता शर्मा जयपुर
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