जाने, क्यों और कैसे मनाया जाता है लोहड़ी का त्यौहार

जाने, क्यों और कैसे मनाया जाता है लोहड़ी का त्यौहार

कहां से आया लोहड़ी शब्द
अनेक लोग मानते हैं कि लोहड़ी शब्द लोई (संत कबीर की पत्नी) से उत्पन्न हुआ था, लेकिन कई लोग इसे तिलोडी से उत्पन्न हुआ मानते हैं, जो बाद में लोहडी हो गया। वहीं, कुछ लोग यह मानते है कि यह शब्द लोह’ से उत्पन्न हुआ था, जो चपाती बनाने के लिए प्रयुक्त एक उपकरण है।


पौराणिक एवम एतिहासिक कथा
पुराणों के आधार पर इसे सती के त्याग के रूप में प्रतिवर्ष याद करके मनाया जाता हैं। कथानुसार जब प्रजापति दक्ष ने अपनी पुत्री सती के पति महादेव शिव का तिरस्कार किया था और अपने जामाता को यज्ञ में शामिल ना करने से उनकी पुत्री ने अपने आपको को अग्नि में समर्पित कर दिया था। उसी दिन को एक पश्चाताप के रूप में प्रति वर्ष लोहडी पर मनाया जाता हैं और इसी कारण घर की विवाहित बेटी को इस दिन तोहफे दिये जाते हैं और भोजन पर आमंत्रित कर उसका मान सम्मान किया जाता हैं। इसी खुशी में श्रृंगार का सामान सभी विवाहित महिलाओ को बांटा जाता हैं।

लोहडी के पीछे एक एतिहासिक कथा भी हैं जिसे दुल्ला भट्टी के नाम से जाना जाता हैं। यह कथा अकबर के शासनकाल की हैं उन दिनों दुल्ला भट्टी पंजाब प्रान्त का सरदार था इसे पंजाब का नायक कहा जाता था। उन दिनों संदलबार नामक एक जगह थी जो अब पाकिस्तान का हिस्सा हैं। वहाँ लडकियों की बाजारी होती थी। तब दुल्ला भट्टी ने इस का विरोध किया और लडकियों को सम्मानपूर्वक इस दुष्कर्म से बचाया और उनकी शादी करवाकर उन्हें सम्मानित जीवन दिया। इस विजय के दिन को लोहडी के गीतों में गाया जाता हैं और दुल्ला भट्टी को याद किया जाता हैं।
इन्ही पौराणिक एवम एतिहासिक कारणों के चलते पंजाब प्रान्त में लोहडी का उत्सव उल्लास के साथ मनाया जाता हैं।

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