परीक्षा में रटा हुआ भूल जाते हैं बच्चे तो अपनाएं यह वैज्ञानिक तरीके, जिससे बढ़ेगी याददाश्त और मिलेगी कामयाबी

परीक्षा में रटा हुआ भूल जाते हैं बच्चे तो अपनाएं यह वैज्ञानिक तरीके, जिससे बढ़ेगी याददाश्त और मिलेगी कामयाबी

अक्सर माता पिता को यह चिंता सताती है कि उनका बच्चा घंटों पढ़ाई करने और सब कुछ याद करने के बाद भी परीक्षा के समय सब भूल जाता है। 
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या मेहनत की कमी नहीं बल्कि पढ़ाई के गलत तरीके के कारण होती है। असल में रटने की प्रक्रिया से जानकारी दिमाग में बहुत कम समय के लिए टिकती है जबकि समझकर पढ़ना याददाश्त को मजबूत बनाता है। 

सीखने के तरीके में बदलाव की जरूरत: 
विशेषज्ञों के अनुसार रटने के बजाय वैचारिक समझ यानी कॉन्सेप्ट लर्निंग पर ध्यान देना चाहिए। जब बच्चा किसी विषय के पीछे के तर्क और कारणों को समझता है तो उसका मस्तिष्क उस जानकारी को लंबे समय तक सुरक्षित रखता है। उदाहरण के तौर पर यदि बच्चा यह समझ ले कि गणित का कोई सूत्र कैसे बना है या विज्ञान की कोई क्रिया कैसे होती है तो उसे याद रखना बहुत आसान हो जाता है। 

बेहतर याददाश्त के मुख्य बिंदु: 
स्मार्ट लक्ष्य तय करना: छात्रों को चाहिए कि वे अपनी पढ़ाई के लिए छोटे और स्पष्ट लक्ष्य बनाएं। बड़े अध्याय को छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ने से दिमाग पर बोझ नहीं पड़ता और एकाग्रता बनी रहती है। 

समय का सही प्रबंधन: 
नियमित पढ़ाई और समय के सही तालमेल से आत्मविश्वास बढ़ता है। हाई स्कूल की चुनौतियों के लिए अभी से अनुशासन और समय की पाबंदी सीखना जरूरी है। 

पोषण और स्वास्थ्य पर ध्यान: 
अच्छी याददाश्त का सीधा संबंध बेहतर खानपान और स्वास्थ्य से है। जीवन कौशल और सही पोषण बच्चों की मानसिक क्षमता को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। 

अभिभावक कैसे करें मदद: 
माता पिता को चाहिए कि वे बच्चों से केवल अंकों के बारे में बात न करें बल्कि उनसे खुले सवाल पूछें। बच्चों को प्रोत्साहित करें कि वे जो भी पढ़ें उसे अपने शब्दों में समझाएं। जब बच्चा किसी विषय को खुद व्याख्या करके बताता है तो वह उसके दिमाग में स्थायी रूप से बैठ जाता है। 
भविष्य की शिक्षा प्रणाली अब केवल रटने पर नहीं बल्कि विश्लेषणात्मक सोच पर टिकी है। जो छात्र रटने की आदत छोड़कर विषयों को गहराई से समझना शुरू करते हैं उनमें न केवल आत्मविश्वास बढ़ता है बल्कि वे वास्तविक जीवन की समस्याओं को सुलझाने में भी सक्षम बनते हैं। रटने से आगे बढ़कर ही बच्चे जीवन भर सीखने वाले और सफल इंसान बन सकते हैं। 
-हेमलता शर्मा, जयपुर

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