जब पति को भाने लगे पराई औरतें

जब पति को भाने लगे पराई औरतें

घर से बाहर लिफ्ट मिलते ही पुरूषों को फिसलते देर नहीं लगती पर वह फिसलन अपने साथ कुछ निशान भी छोड जाती है, जिस से पत्नियों को सजग हो जाना चाहिए। किसी भी स्त्री के पति को इश्क का रोग लग जाना कोई छोटी-मोटी आम घटना नहीं, इस रोग का गंभीर रूप उन के बीच तलाक तक का करण बन सकता है। इसलिए जरूरी है कि पत्नी इस रोग के लक्षणों को तब ही पहचान ले जब उसके पति के कदम ताजा-ताजा भटकने आरंभ ही हुए हों। तब तो ये लक्षण ही उसे चेता सकेंगे। दूसरी स्त्री से प्रेम का चक्कर चलाने को उत्सुक पति का व्यवहार बदले बिना नहीं रह सकता। उस के ऊपर मानसिक व भावनात्मक दबाव बहुत ज्यादा रहता हैं। वह जीवन संगिनी को धोखा देने की राह पर कदम बढ़ा रहा है्र। उसे कभी नए नए रोमांस की उत्तेजना पकडेंगी, तो कभी पत्नी को छलने का अपराधबोध। वह इस अफेयर को छिपाकर रखना चाहता है। उसे अपनी बदनामी का डर सताता है। दो नावों की सवारी करने की टेंशन, चिढ और गुस्सा उसे पकडते हैं। उसे प्रेमिका की नजरों में अपनी छवि सुधारनी है, उस का दिल जीतना है, उससे मिलने का समय निकालना बडी समस्या बन जाती है। पतिदेव की आय सीमित हो तो आर्थिक कठिनाईयां तंग करेंगी क्योंकि इश्क लडाना खर्चीला सौदा है। पति में आ रहे बदलाव को वह पत्नी जरूर पकड लेगी, जो ऎसी किसी अनहोनी संभावना के प्रति पहले से सजग हो। पति के दिलफेंक स्वभाव की पहचान उसे चौकन्ना रखने मे सहायक सिद्ध होगी।
जब वह खोये-खोये से रहने लगें...
इश्क की पतंग की ऊंची उडानो के चक्कर में फंसे पतिदेव का व्यवहार बदलेगा। पत्नी को वह कभी बेवजह बहुत प्रसन्न नजर आएंगे, कभी तनावग्रस्त व चिडचिडे से। प्रेमिका का व्यवहार इन जनाब का मूड निर्धारित करने लगता है।
उस की पंसद-नापसंद के अनुरूप जीने का प्रयास शुरू हो जाता है। प्रेमिका की यादों में खोए साहब पत्नी की बगल में होते हुए भी कहीं दूर होते हैं। कई बार कहने पर कुछ समझ में आएगा। वार्तालाप का सिरा बारंबार खो देंगे व चौंक जाएंगे। अपनी सपनों की रानी का दिल जीतने के प्रयास करना जरूरी हो जाता है।
वजन, खास कर के तोंद कम करने के लिए घूमना व व्यायाम करना दिनचर्या में शामिल हो जाएगा। अपने डोले चेक करते हुए दिन में कई बार पत्नी उन्हें पकड सकती है। उनकी प्रेमिका की पसंद अब उन का वार्डरोब निर्धारित करेगी। नए रंग व नए स्टाइल में खुद को आकर्षक बनाने का पतिदेव का प्रयास पत्नि सहित बाकी लोगों को न जंचे तो भी वह उसे बदलेंगे नहीं।
सजने-धजने की सनक सज-संवर
कर आकर्षक बनना है तो शीशे के सामने उन का ज्यादा वक्त बीतेगा ही। जूते पॉलिश कर रोज चमकाए जाएंगे। दाढ़ी बडे़ ध्यान से बनेगी। डिओ और सेंट की खरीदारी में बढोतरी होगी। घर से महकते हुए निकलेंगे साहब। वापसी में उनके कप़डें से अगर लेडीज सेट की खुशबू पत्नी अगर पकड ले तो रोग का निदान पक्का हो जाएगा। पतिदेव को प्रेमिका के साथ घूमने फिरने के लिए समय भी निकालना पडेगा। घर देर से पहुंचने के झूठे बहाने बनाना उन की मजबूरी ही समझा जाना चाहिए। किसी बीमार दोस्त को देखने जाने के मौके बढने लगेंगे। दोस्त भी ऎसा होगा जिस से बीवी की मुलाकात होने की उम्मीद न के बराबर हो। अर्जेट मीटिंगों की संख्या बढने लगेगी। ओवरटाइम करने का जोश अचानक बढ जाएगा। पत्नि को शाम की चाय व रात का खाना अगर आए दिन अकेले खाना पडे, तो उसे चौकन्ना हो जाना चाहिए। इश्क के शुरूआती दिनों में रोमांस की बैटरी प्रमिका चार्ज करती है और इस का फायदा पत्नी को भी पहुंचता है। कहीं का जोश कहीं उतरता है। तब पत्नी इस भ्रम का शिकार हो सकती है कि उसके साहब उसके पहले से जयादा प्यार करने लगे हैं। बाद में प्रेमिका से तुलना कर के पतिदेव पत्नी से खीजने लगेंगे। तब रोमांस की जगह उदासीनता, चिढ व तानों का सामना करना पड सकता है पत्नी को। यौन संबंधों में पति की तरफ से अकारण बहुत ज्यादा बदलाव आना उन की जिंदगी में दूसरी औरत के वजूद का सूचक हो सकता है, पत्नी इसे सदा याद रखे। पति के मन का अपराधबोध, चिढ व तनाव उसे पत्नी से आंखें मिला कर बात नहीं करने देते। उस की उपस्थिति में वह या तो कटा-कटा सा रहता है या बेकार के झगडे शुरू कर देगा। प्रेमिका से मिलने की राह का कांटा प्रतीत होने वाली पत्नी से पतिदेव के संबंध धीरे-धीरे अपनी सहजता व आत्मीयता खोने लगेंगे।
जब बदलने लगे पति का व्यवहार
साथ-साथ नई फिल्म देखते हुए पत्नी को एहसास हो सकता है कि पतिदेव की दिलचस्पी फिल्म में नहीं है। क्या इन्होंने यह फिल्म किसी के साथ पहले तो नहीं देख ली हैक् जिस पत्नी के मन में यह सवाल नहीं उठेगा, वह दूसरी औरत की उपस्थिति को बडी देर से ही पकड सकेगी। पत्नी मायके जाने का जिक्र छेडे और पति की आंखों में खुशी की चमक चंद पलों के लिए साफ नजर आए तो समझें कि दाल में कुछ काला है। पति के व्यवहार व स्वभाव मे ऎसे छोटे बडे बहुत से बदलाव पत्नी नोट कर सकती है जो उसके जीवन में प्रेमिका की मौजूदगी की तरफ इशारा करेंगे। लेकिन ये बदलाव पक्के सबूत नहीं बन सकते। उसे अपने शक को यकीन में बदलने का सबूत पति की आंखों में गहराई से झांकने पर साफ नजर आ सकता है। वहां उसे प्यार, खुशी, संतोष व अपनेपन की बजाय नाराजगी, चिढ, शिकायतें, उदासीनता, अपराधबोध, नफरत व गुस्से जैसे भाव अकारण नजर आएं तो उसे समझ लेना चाहिए कि दोनों के दिलों के बीच दूरियां बढ गई हैं और इस के पीछे दूसरी औरत की मौजूदगी हो सकती है।
पति को जब चढे इश्क का बुखार...
पति जब अपनी प्रेमिका की खातिर पत्नी से दूर होने का फैसला मन ही मन कर लेता है तब इश्क का रोग गंभीर रूप ले लेता है। पति तलाक लेने का इच्छुक बन जाएगा या फिर मानसिक व भावनात्मक स्तर पर कैसा भी संबंध पत्नी के साथ कायम रखने में उसकी दिलचस्पी नहीं होगी। अब प्रेमिका के अस्तित्व को पत्नी की नजरों से छिपा कर रखने में पति की दिलचस्पी नहीं रहती। गुस्सा उसकी नाक पर रहता है और छोटी सी बात पर भी आंखों से नफरत की चिंगारियां बरसने लगेंगी। उसे पत्नी के सुख-दुख से कोई वास्ता नहीं रहता। बेमेल जोडी बन जाने का दुखडा रोने के साथ-साथ वह छुटकारा पाने की धमकी खुलेआम देने लगता है। झगडों के बाद की खामोशी बडी गहरी होती है। पत्नी कोशिश करके भी उसका ध्यान, प्रेम या सहानुभूति नहीं पा सकती। उसे बारंबार महसूस होता है मानो उसने अपने पति को सदा के लिए खो दिया है। उस का रोना, आंसू बहाना, गिडगिडाना पति के अंदर कोई बदलाव नहीं ला पाता है। पति को लगे इश्क के रोग का इस स्टेज पर इलाज संभव नहीं। पत्नी चाह कर भी दिलों के बीच खाई को नहीं भर पाएगी। अब उसका प्यार, उसकी सेवा व समर्पण भी पति को चिढाएगा ही। दूसरी औरत से चल रहे पति के इश्क रोग को पत्नी आरंभिक लक्षणों से ही पकड ले तो समस्या का समाधान भी जरूर कर सकती है। पति आकष्ाüक व्यक्तित्व के स्वामी हों तो डर कर अकारण ही उन पर शक करने की नासमझी भी न दिखाएं। किसी स्त्री के साथ उन का चक्कर चलने की जानकारी मिले तो बौखला जाना भी ठीक नहीं। इस स्थिति में रोने-धोने, झगडने व शिकायतें करने से मामला दब तो सकता है,सुलझेगा नहीं। अपने दाम्पत्य संबंधों पर गंभीर दृष्टि डालें और अपनी कमियों को पकडने पर ज्यादा ध्यान दें। मौखिक संवाद से ही नहीं बल्कि एक्शन के स्तर पर भी समस्या समाधान के लिए ठोस कदम उठाएं। शांतिपूर्ण ढंग से पति को उनके गलत कदम के दूरगामी परिणाम समझाएं। अपने व्यक्तित्व को आकष्ाüक बनाने के लिए उसे निखारें व नयापन लाएं, दूसरी औरत से उन्हें दूर करने को शोरशराबा मचाने से ज्यादा खुद को उनके दिल के करीब लाने के प्रयास करना ज्यादा जरूरी है। अपने कर्तव्यों को निभाते हुए अधिकारों की मांग करें।

अनचाहे गर्भ से बचाव अब बहुत ही आसान

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