
हेल्दी प्रेग्नेंसी, सेफ डिलीवरी : जानिए एंटीनेटल केयर के गोल्डन रूल्स
नई दिल्ली। प्रेग्नेंसी किसी भी महिला के जीवन का सबसे खास और संवेदनशील समय होता है। इस दौरान सही देखभाल न सिर्फ मां को स्वस्थ रखती है, बल्कि बच्चे के अच्छे विकास और सुरक्षित डिलीवरी में भी अहम भूमिका निभाती है। इसी देखभाल को एंटीनेटल केयर या प्रसवपूर्व देखभाल कहा जाता है। इसका मकसद केवल बीमारी से बचाव नहीं, बल्कि एक पॉजिटिव प्रेग्नेंसी अनुभव देना भी होता है, ताकि मां शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से मजबूत रहे।
एंटीनेटल केयर की शुरुआत प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों से ही हो जानी चाहिए। जैसे ही गर्भ ठहरने की पुष्टि हो, नजदीकी हेल्थ सेंटर या अस्पताल में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है। इसके बाद समय-समय पर डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी से जांच कराते रहना चाहिए। नियमित चेकअप से मां के वजन, ब्लड प्रेशर, खून की कमी, शुगर और यूरिन से जुड़ी किसी भी समस्या का समय रहते पता चल जाता है, जिससे जटिलताओं से बचा जा सकता है।
हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए सही खान-पान बहुत जरूरी है। रोजाना संतुलित आहार लेना चाहिए, जिसमें दालें, हरी सब्जियां, फल, दूध और अनाज शामिल हों। आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां डॉक्टर की सलाह से रोज लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे खून की कमी नहीं होती और बच्चे के दिमागी विकास में मदद मिलती है। कैफीन यानी चाय-कॉफी का सेवन कम करना चाहिए और तंबाकू, शराब जैसी चीजों से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए।
प्रेग्नेंसी में यह सोच आम है कि आराम ही आराम करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। रोजमर्रा की हल्की-फुल्की गतिविधियां जैसे टहलना या घर का सामान्य काम करना फायदेमंद होता है। हालांकि भारी सामान उठाने, ज्यादा थकाने वाले काम और जरूरत से ज्यादा व्यायाम से बचना चाहिए। साथ ही बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि कुछ दवाइयां बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।
मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही अहम है जितना शारीरिक स्वास्थ्य।
प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलाव की वजह से मूड स्विंग, चिंता या डर होना सामान्य है। ऐसे में परिवार का सहयोग, खुलकर बातचीत और सही काउंसलिंग बहुत मदद करती है। न्यूट्रिशन काउंसलिंग और बच्चे के जन्म की तैयारी से जुड़ी जानकारी मां को आत्मविश्वास देती है और डिलीवरी का डर कम करती है।
एंटीनेटल केयर का एक अहम हिस्सा हर महीने के हिसाब से सही डाइट और देखभाल अपनाना भी है। जैसे-जैसे प्रेग्नेंसी आगे बढ़ती है, शरीर की जरूरतें बदलती हैं। इसलिए हल्का, पौष्टिक और आसानी से पचने वाला भोजन लेना चाहिए। मसालेदार और बहुत तला-भुना खाना कम करना बेहतर होता है। -आईएएनएस
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