Health Advice : क्या आप भी खर्राटों से परेशान हैं, यहां जानिए बचने का आसान उपाय

Health Advice : क्या आप भी खर्राटों से परेशान हैं, यहां जानिए बचने का आसान उपाय

जयपुर। खर्राटों का कारण होता है खुले मुंह से सांस लेना और जीभ एवं टॉन्सिल के पीछे की सॉफ्ट प्लेट में कंपन पैदा होना। इस वजह से खर्राटे की आवाज पैदा होती है,खर्राटे से केवल आवाज ही पैदा नहीं होती बल्कि यह एक स्वास्थ्य समस्या है और इसे केवल शोर से होने वाली परेशानी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 

खर्राटे व्यक्ति में अव्यवस्थित नींद का संकेत होते हैं जो अनेक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन जाते हैं। स्लीप ऐप्निया रोग यानि श्वास लेने में परेशानी होना झटके से नींद खुलना हो जाता है इसका इलाज न हो पाने पर आपको हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है। इससे धीरे धीरे दिल का आकार बड़ा हो जाता है। दिल के दौरे और स्ट्रोक आने का खतरा बढ़ जाता है। इसमें आपकी जीवनशैली की आदतें अहम भूमिका निभाती हैं, जिन्हें कारगर तरीके से सुधारा जा सकता है। 

शराब का सेवन, धूम्रपान और कुछ दवाएं गले की मांसपेशियों को ढीला कर सांस का प्रवाह रोक देती हैं इनको लेने से बचें, धूम्रपान से नाक के मार्ग और गले की मांसपेशियों में जलन भी होती है और सूजन आ जाती है, जो सांस लेने में बाधा बनती है। 

खराटे आने के कुछ कारण इस प्रकार हो सकते हैं : टॉन्सिल या ऐडिनॉयडस का बड़ा होना,गले में सूजन होना। नाक के साईनस में सूजन या जमाव। नाक की झिल्ली का टेढ़ा होना। नेजल पालिप्स का होना। पीठ के बल सोना, जिससे जबान पीछे गिरकर सांस की नली को बाधित कर देती है। उम्र बढ़ने के साथ गले की मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं। शराब या ट्रैंक्विलाइजर, दर्दनिवारक या सेडेटिव्स जैसी दवाएं, दिमाग में तनाव पैदा करती हैं और मांसपेशियों को कमजोर कर देती हैं। 

खर्राटों के कारणों का पता लगाएं और उनके इलाज के लिए उचित कदम उठाएं : एक करवट पर सोने से जीभ सांस को बंद नहीं करती, जिससे खर्राटे रोकने में मदद मिलती है। खर्राटों से बचने के लिए विशेष तकिया बनाया जा सकता है। इसमें गर्दन वाला हिस्सा सिर वाले हिस्से की तुलना में भरा हुआ होता है, जिससे गर्दन को सहारा मिलता है और खर्राटे रुकते हैं। अगर आपका वजन ज्यादा है तो उसको कम करें। खासतौर पर पेट का वजन। धूम्रपान छोड़ें इससे नाक की झिल्ली और गले में जलन होती है। अगर आप नकली दांत लगाते हैं तो सोते समय उन्हें उतार दें। नाक के अंदर गाय का घी या अणु तैल की नष्य डालकर सोएं। 

- डा. पीयूष त्रिवेदी, आयुर्वेद विशेषज्ञ एक्यूप्रेशर सेवा समिति जयपुर। 9828011871

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