जानें किन मूलांक वालों के स्वभाव में होती है अस्थिरता

जानें किन मूलांक वालों के स्वभाव में होती है अस्थिरता

अंक ज्योतिष के अनुसार हमारे जन्म की तारीख केवल एक नंबर नहीं बल्कि हमारे व्यक्तित्व का आईना होती है। न्यूमेरोलॉजी विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रहों की चाल और मूलांक की ऊर्जा हमारे प्रेम संबंधों और व्यवहार को गहराई से प्रभावित करती है। कुछ खास मूलांक वाले लोग अपने स्वभाव की वजह से रिश्तों में टिक नहीं पाते या अनजाने में दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचा देते हैं।

मूलांक 1: स्वाभिमान और ईगो का टकराव

अंक 1 का स्वामी सूर्य है जो तेज और अधिकार का प्रतीक है। इस मूलांक के लोग नेतृत्व करने में माहिर होते हैं लेकिन रिश्तों में इनका अधिक स्वाभिमान कभी-कभी अहंकार का रूप ले लेता है। अपनी बात को ऊपर रखने की जिद के कारण ये अक्सर अपने जीवनसाथी से भावनात्मक तालमेल नहीं बिठा पाते और अकेलेपन का शिकार हो जाते हैं।

मूलांक 3: उम्मीदों का भारी बोझ
बृहस्पति यानी गुरु ग्रह से प्रभावित मूलांक 3 के लोग बहुत ज्ञानी और रचनात्मक होते हैं। समस्या तब आती है जब ये अपने पार्टनर से जरूरत से ज्यादा उम्मीदें लगा लेते हैं। जब सामने वाला इनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता तो ये जल्दी निराश हो जाते हैं और रिश्ते को सुधारने के बजाय उससे बाहर निकलना बेहतर समझते हैं।

मूलांक 5: बदलाव और आजादी की चाहत
बुध ग्रह के प्रभाव वाले मूलांक 5 के लोग स्वभाव से बहुत ही चंचल और उत्साही होते हैं। इन्हें जीवन में हमेशा नयापन चाहिए होता है। बंधन में बंधना इन्हें अपनी आजादी में खलल जैसा लगता है। यही कारण है कि ये लोग किसी एक व्यक्ति के साथ लंबे समय तक कमिटमेंट निभाने में असहज महसूस करते हैं और अक्सर इनका मन भटकने लगता है।

मूलांक 6 आकर्षण और भावनाओं का भ्रम
शुक्र ग्रह प्रेम और सौंदर्य का कारक है और मूलांक 6 इसी ग्रह से संचालित होता है। ये लोग दिखने में बहुत आकर्षक और मिलनसार होते हैं। इनका व्यक्तित्व दूसरों को जल्दी प्रभावित कर लेता है। आकर्षण की इस अधिकता के कारण ये अक्सर सच्चे प्रेम और केवल आकर्षण के बीच का अंतर नहीं समझ पाते जिससे इनके जीवन में कई बार रिश्तों का उतार-चढ़ाव बना रहता है।

रिश्तों में स्थिरता की कमी
न्यूमेरोलॉजी के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि मूलांक 5 और 6 के लोग सबसे ज्यादा भावनात्मक उतार-चढ़ाव का सामना करते हैं। इनकी चंचलता और नएपन की तलाश अक्सर इन्हें समाज की नजरों में अविश्वसनीय बना देती है। हालांकि यह पूरी तरह व्यक्ति के संस्कारों और परिवेश पर भी निर्भर करता है।

हेमलता शर्मा जयपुर

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