प्यार बढाने के लिए जरूरी है तकरार भी

प्यार बढाने के लिए जरूरी है तकरार भी

झगडा तो हर पति-पत्नी के बीच होता अगर इस बात को ले कर एकदूसरे बातचीत करना बंद कर दें या घर में कलह का माहौल बन जाए तो अवश्य ही रिश्ते में दरार आ सकती है। वैसे तो थोडी बहुत तकरार आम बात होती है। पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी तकरार होती ही रहती है। अगर यह न हो तो जीवन नीरस बन जाएगा। पतिपत्नी के बीच बिना किसी ठोस वजह के झगडा या तकरार हो या अपने साथी को आहत करना अथावा उस तकरार को संबंधों में कडवाहट लाने की वजह बनाना ठीक नहीं है। तकरार को कुछ देर बाद भूल जाएं या जिस की गलती हो वह गलती मान ले तो स्थिति सामान्य हो जाती है। वैसे भी पतिपत्नी का रिश्ता ऎसा होता है कि चाहे कितना भी झगडा क्यों ना हो जाए, उन के बीच मनमुटाव बहूत देर तक कायम नहीं रह सकता है।
झगडना एक स्वाभाविक प्रवृति है इसलिए कोई भी व्यक्ति इसे अछूता नहीं रह सकता है। पति पत्नी को बर्थडे विश करना भूल गया तो तकरार हो गई। पत्नी ने पति को सूट ड्राईक्लीन करा नहीं रखा तो तकरार या अगर वादा करके पति समय पर घर नहीं आया तो तकरार हो गई। यानी तकरा की अनगिनत वजहें हो सकती हैं। लेकिन तकरा इसलिए नहीं होती कि वे एकदूसरे को पसंद नहीं करते हैं, बल्कि इसलिए होती है, क्योंकि दोनों एकदूसरे को प्यार करते हैं।
मधुरता के लिए
जहां प्यार होता है, वहां अपेक्षाएं सहज ही पैदा हो जाती हैं और जब अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं तो आपस में लडाई हो ही जाती है, जो बहुत ही स्वाभाविक है। रोजमर्रा की जिंदगी में ऎसा होता है कि अपनी आदतों व हरकतें से पति-पत्नी एकदूसरे को चोट पहुंचाते है। किंतु इस चोट का दर्द स्थायी नहीं होता है और उन दौनों के बीच इस के बावजूद मधुरता बनी रहती है। रिश्ते में प्रगाढता और मधुरता बनाए रखने के लिए तकरार या झगडा होना नितांत आवश्यक है।
रिश्ते की मजबूती के लिए
जो युगल झगडा करते हैं उन का रिश्ता ज्यादा मजबूत होता है। ऎसा इसलिए क्योंकि जो युगल जोडे झगडे से बचने की कोशिश करते हैं,उन के बीच अलगाव होने की आशंका सब से ज्यादा होती है, क्योंकि वे कभी भी उन मुद्दो को सुलझाने की कोशिश नहीं करते हैं, जिन्हें सुलझाने की आवश्कता होती है। वे चुप रह कर जिन कुंठाओं को दबा देते हैं, बाद में वही ज्वाला बन कर फूटती है। समस्याएं उत्पन्न होने पर अगर वे 2 समझदार व्यक्तियों की तरह बात करें तो खाई पाटी जा सकती है।
जीवंतता का प्रतीक
अगर पतिपत्नी के बीच तकरार होती रहती है, तो इसे वैचारिक भिन्नता से ज्यादा इस बात की निशानी मानना चाहिए कि उन के बीच जुडाव बहुत अधिक है। झगडा संबंधों में जीवंतता का प्रतीक बरकरार है। वे चाहें कितना ही झगडे पर एकदूसरे से अलग नहीं हैं। सचाई तो यह है कि कोई भी इंसान परफैक्ट नहीं होता है। कमी हर रिश्ते की तरह पतिपत्नी के रिश्ते में भी होती है। आपसी जुडाव तभी उत्पन्न होता है, जब एक साथी को यह पता हो कि दूसरा साथी क्या सोच रहा है या क्या महसूस कर रहा है। इस का अर्थ यह हुआ कि विचारों की भिन्नता को एकदूसरे के समक्ष लाना न कि चुप रह कर मन ही मन घुलते रहना। बोल कर, अपनी राय दे कर इस नतीजे पर पहुंचना कि क्या सही है और क्या गलत, एक स्वस्थ रिश्ते की निशानी है। बहस से बचने के चक्कर में अगर झगडा न किया जाए तो समस्या गंभीर बन सकती है और रिश्ते में दरार भी आ सकती है।
स्वास्थ्यवर्धक
झगडा स्वास्थ्यवर्धक भी होता है और अगर उसका ठीक तरह से उपयोग किया जाए तो वह रिश्ते को पुख्ता करने और ऊर्जावान बनाने में भी सहायक होता है। पर इस का अर्थ यह नहीं कि जब भी आप को लगे कि रिश्ते में गरमाहट की कमी हो रही है, आप झगडा करने लगें। पति-पत्नी का संबंध ऎसा होता है कि उन के बीच कोई भी विवाद बहुत लंबे समय तक चल ही नहीं सकता है। इसलिए अगर तकरार हो भी गई तो उसे तूल न दें और न ही यह उम्मीद रखें कि साथी से माफी मांग लें। इस से आप किसी भी तरह से उस की नजरों में छोटे नहीं होंगे, बल्कि आप की पहल आप के संबंधों को और प्रगाढता देगी।

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