Career: नीट में नहीं मिला सिलेक्शन तो न हों मायूस, 12वीं के बाद इन कोर्सेज से हेल्थ केयर सेक्टर में मचाएं धूम

Career: नीट में नहीं मिला सिलेक्शन तो न हों मायूस, 12वीं के बाद इन कोर्सेज से हेल्थ केयर सेक्टर में मचाएं धूम

​हर साल देश में लाखों युवा आंखों में डॉक्टर बनने का सपना लिए नीट की परीक्षा में बैठते हैं। दिन रात की जीतोड़ मेहनत के बाद भी जब कुछ नंबरों से एमबीबीएस की सीट हाथ से निकल जाती है तो कई छात्र डिप्रेशन या निराशा के दौर में चले जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बदलते दौर में मेडिकल फील्ड का दायरा सिर्फ एमबीबीएस या बीडीएस तक ही सीमित नहीं रह गया है। 

​आज देश दुनिया के हेल्थकेयर सेक्टर में जितनी जरूरत सर्जन्स की है उतनी ही डिमांड सपोर्टिंग मेडिकल स्टाफ और एक्सपर्ट्स की भी है। अच्छी बात यह है कि 12वीं बायोलॉजी के बाद ऐसे कई शानदार और हाई सैलरी कोर्सेज हैं जिनमें एडमिशन के लिए आपको नीट के स्कोर की कोई जरूरत नहीं होती।

​इन सेक्टर्स में हैं करियर के सबसे बेस्ट ऑप्शन: ​
अगर आप बिना नीट के मेडिकल की दुनिया में नाम और पैसा दोनों कमाना चाहते हैं तो इन प्रमुख कोर्सेज पर नजर डाल सकते हैं। ​

बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी बीपीटी स्पोर्ट्स: 
इंजरी से लेकर लाइफस्टाइल की बीमारियों तक आज हर जगह फिजियोथेरेपिस्ट की भारी मांग है। यह आपको खुद का क्लिनिक खोलने की आजादी भी देता है। ​ बीएससी नर्सिंग देश ही नहीं बल्कि विदेशों जैसे यूके कनाडा गल्फ देश में भारतीय नर्सों की जबरदस्त डिमांड है। यह एक बेहद सम्मानजनक और सुरक्षित करियर है। ​

बैचलर ऑफ फार्मेसी, बी फार्मा: 
दवाइयों की रिसर्च मैन्युफैक्चरिंग और मार्केटिंग से जुड़ा यह कोर्स बिजनेस माइंडेड स्टूडेंट्स के लिए बेस्ट माना जाता है। ​ बीएससी लैब टेक्नोलॉजी बीएमएलटी और रेडियोलॉजी बीमारी का इलाज बिना सही जांच ब्लड टेस्ट एमआरआई एक्स रे के मुमकिन नहीं है। यही वजह है कि डायग्नोस्टिक सेंटर्स में इन प्रोफेशनल्स की मांग कभी कम नहीं होती। ​

योग्यता और एडमिशन का क्या है फंडा: ​

इन कोर्सेज में दाखिला लेने का प्रोसेस बेहद सीधा और आसान है।​ सबसे बुनियादी शर्त यह है कि आपने अपनी 12वीं की पढ़ाई फिजिक्स केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषयों के साथ पूरी की हो।​ अधिकांश अच्छे कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में एडमिशन के लिए 12वीं में कम से कम पचास प्रतिशत अंक होना जरूरी है।​ कुछ नामी संस्थान अपने स्तर पर एक छोटा सा एंट्रेंस टेस्ट आयोजित करते हैं जबकि कई कॉलेज सीधे तौर पर 12वीं की मेरिट के आधार पर एडमिशन दे देते हैं। ​


कितना आता है खर्च, फीस का गणित:
पढ़ाई का खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस संस्थान को चुनते हैं।​ सरकारी संस्थान अगर आप सरकारी कॉलेजों में जगह बनाने में कामयाब रहते हैं तो सालाना फीस बेहद मामूली यानी पंद्रह हजार से पचास हजार रुपये के बीच होती है।​ प्राइवेट यूनिवर्सिटीज निजी कॉलेजों में इन कोर्सेज की फीस करीब एक लाख से लेकर ढाई लाख रुपये सालाना तक जा सकती है।

​भविष्य और कमाई की संभावनाएं: ​

ये कोर्सेज सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं देते बल्कि पूरी तरह जॉब ओरिएंटेड हैं। कोर्स पूरा करते ही आप बड़े प्राइवेट अस्पतालों सरकारी स्वास्थ्य विभागों फार्मा कंपनियों या खुद के स्टार्टअप के जरिए काम शुरू कर सकते हैं।​ एक फ्रेशर के तौर पर आपकी शुरुआत पच्चीस हजार से चालीस हजार रुपये प्रति महीने करीब तीन से पांच लाख रुपये सालाना से हो सकती है। जैसे जैसे फील्ड में आपका अनुभव और हुनर बढ़ता है आपकी सैलरी का ग्राफ तेजी से ऊपर जाता है। ​करियर का कोई भी रास्ता छोटा या बड़ा नहीं होता। अगर नीट क्लियर नहीं भी हुआ तो भी निराश होने के बजाय इन प्रैक्टिकल और हाई डिमांड सेक्टर्स को चुनें क्योंकि आज का हेल्थकेयर सिस्टम इन एक्सपर्ट्स के बिना अधूरा है। 

-हेमलता शर्मा, जयपुर

#गोरापन पल भर में...अब आपके हाथों में



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