
26 अप्रैल का पंचांग : बैशाख शुक्ल की दशमी तिथि पर अभिजित व विजय मुहूर्त, नोट कर लें राहुकाल
नई दिल्ली। सनातन धर्म में पंचांग का बेहद महत्व है। इसके पांच अंगों (नक्षत्र, योग, वार, तिथि, करण ) के आधार पर ही शुभ-अशुभ समय के साथ ही दिन की शुरुआत का निर्धारण होता है। बैशाख मास, शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 26 अप्रैल (रविवार) को है।
दृक पंचांग के अनुसार, रविवार को सूर्योदय 5 बजकर 45 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 53 मिनट पर होगा। चंद्रोदय दोपहर 2 बजकर 10 मिनट पर और चंद्रास्त 27 अप्रैल की सुबह 3 बजकर 3 मिनट पर होगा। पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि शाम 6 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। उसके बाद एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी।
हालांकि, उदयातिथि के अनुसार, पूरे दिन दशमी तिथि का ही मान होगा।
26 अप्रैल को नक्षत्र मघा शाम 8 बजकर 27 मिनट तक रहेगा, इसके बाद पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र लगेगा। योग वृद्धि शाम 10 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। करण तैतिल सुबह 6 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। रविवार को वणिज योग है।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 18 मिनट से 5 बजकर 1 मिनट तक रहेगा।
26 अप्रैल के शुभ मुहूर्त की बात करें तो अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य शुरू करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 23 मिनट तक रहेगा, जो सफलता और विजय के लिए शुभ है।
अमृत काल शाम 6 बजकर 1 मिनट से 7 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 14 मिनट तक होगा।
वहीं, सायाह्न सन्ध्या शाम 6 बजकर 53 मिनट से 7 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। निशिता मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से 27 अप्रैल की देर रात 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। रवि योग सुबह 5 बजकर 45 मिनट से शाम 8 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।
अशुभ समय की जानकारी भी महत्वपूर्ण है। राहुकाल शाम 5 बजकर 15 मिनट से 6 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।
इस दौरान किसी भी नए काम की शुरुआत न करें। यमगण्ड दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 36 मिनट से 5 बजकर 15 मिनट तक होगा। दुर्मुहूर्त शाम 5 बजकर 8 मिनट से 6 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। वर्ज्य समय सुबह 8 बजकर 16 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।
गण्ड मूल और विडाल योग भी सक्रिय रहेगा। बाण अग्नि दोपहर 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। ध्रुव और गर समय भी शाम 6 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष के अनुसार अशुभ समय में सावधानी बरतें। राहुकाल और दुर्मुहूर्त में कोई नया काम न शुरू करें।
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