8 टिप्स:फूड एलर्जी की समस्या और उपचार

8 टिप्स:फूड एलर्जी की समस्या और उपचार

कब होती है फूड एलर्जी फूड एलर्जी की शुरूआत बचपन से भी हो सकती है इसलिए बच्चो को पांच साल की उम्र से ही एलर्जी वाली खाध सामग्री यानी अंडे, गेहूं, दूध व सोया न दिया जाए तो एलर्जी होने का डर नहीं होता है। फूड एलर्जी का संबंध शरीर के रोग-प्रतिरोधक तंत्र से है। हमारे शरीर का रोग-प्रतिरोधक तंत्र हानिकारक तत्वों जैसे बैकटीरिया, वायरस और जहरीले पदाथों� का प्रतिवाद करता है। फूड एलर्जी किसी भी खाध पदार्थ से हो सकती है, और ज्यादातर इसकी वजह प्रोटीन देखने में आती है यह फूड एलर्जी अधिकतर बाहर खाने से भी होती हैं। जिस खाध पदार्थ से शरीर में एलर्जी होती है उसे खाने पर भी प्रतिरोधक तंत्र प्रतिक्रिया करता है। तब शरीर में इम्यूनोग्लोबिन ई नामक एंटीबॉडिज बनने लगती है जो कोशिशकाओं में जाकर केमिकल्स का रिसाव करता है। जिसके कारण एलर्जी हो जाती है, और इसे ही हम फूड एलर्जी कहते हैं। एलर्जी सिन्ड्रोम जब मंहु और जीभ को प्रभावित करता है, तो ऎसा अधिकर ताजे फल व सब्जियां खाने से होता है। इस तरह के खाने में कुछ पोलेन्स से मिलते जुलते तत्व होते हैं, जिनके कारण एलर्जी हो जाती है जैसे खरबूज में रेगवीड पॉलेन के और सेब में ट्री पॉलेन के तत्व होते हैं।


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