Health Advice : आखिर क्यों जरूरी है खाने में विविधता, आयुर्वेद से जानिए परफेक्ट थाली का सीक्रेट

Health Advice : आखिर क्यों जरूरी है खाने में विविधता, आयुर्वेद से जानिए परफेक्ट थाली का सीक्रेट


हैल्थ डेस्क। नई दिल्ली 
अच्छी सेहत के लिए सिर्फ पेट भरना ही काफी नहीं है, बल्कि खाने में पोषण और विविधता होना भी जरूरी है। आयुर्वेद में भी संतुलित और पौष्टिक आहार को स्वस्थ जीवन का अहम हिस्सा माना गया है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए आयुष मंत्रालय ने लोगों को रोजाना के भोजन में अलग-अलग खाद्य समूहों को शामिल करने की सलाह दी है। आयुर्वेद दिवस 2026 की थीम स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद रखी गई है और यह 23 सितंबर को मनाया जाएगा। इस मौके पर आयुष मंत्रालय की ओर से खान-पान को लेकर भी जागरूक किया जा रहा है। 

मंत्रालय के मुताबिक, रोज के भोजन में अलग-अलग तरह के खाद्य पदार्थ शामिल करने के साथ मौसम और क्षेत्र के अनुसार मिलने वाले खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देनी चाहिए। हमारी रोज की थाली में अनाज की अहम भूमिका होती है। लेकिन हर दिन एक ही अनाज खाने के बजाय अलग-अलग अनाजों को भोजन का हिस्सा बनाना चाहिए। गेहूं और चावल के अलावा ज्वार, बाजरा, जौ, रागी, मक्का और कोदो जैसे अनाज भी आहार में शामिल किए जा सकते हैं। दालें और फलियां भारतीय भोजन का अहम हिस्सा हैं। 

आयुष मंत्रालय ने आहार में अलग-अलग तरह की दालों और फलियों को शामिल करने पर जोर दिया है। मूंग, काला चना, मोठ, मसूर, अरहर, राजमा और चना जैसे विकल्पों को अपनी डाइट में जगह दी जा सकती है। इन्हें दाल, सब्जी, सलाद या अन्य पारंपरिक व्यंजनों के रूप में भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। 

आयुर्वेद में मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार भोजन करने की परंपरा रही है। इसलिए कोशिश करें कि अपने क्षेत्र में मौसम के दौरान आसानी से उपलब्ध ताजे फल और सब्जियों को भोजन में शामिल करें। पालक, मेथी, गाजर, कद्दू, केला, सेब और अनार जैसे फल-सब्जियां शामिल की जा सकती हैं। 

भारतीय रसोई में मसालों का इस्तेमाल सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि पारंपरिक भोजन का अहम हिस्सा भी रहा है। जीरा, दालचीनी, सोंठ, लहसुन, इलायची, अजवाइन, हल्दी और काली मिर्च जैसे मसालों को उचित मात्रा में रोज के भोजन में इस्तेमाल किया जा सकता है।

#घरेलू उपाय से रखें पेट साफ



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