
माता पिता की सही सलाह भी टीनएज बच्चों को क्यों लगती है बुरी जानिए वजह और पेरेंटिंग के नए तरीके
टीनएज एक ऐसा नाजुक दौर होता है जिसमें बच्चे अपने माता पिता से बात बात पर चिढ़ने लगते हैं। जब बच्चे किसी समस्या को लेकर आते हैं और माता पिता तुरंत सलाह देने लगते हैं तो बच्चों का अक्सर एक ही जवाब होता है कि आप मेरी बात नहीं समझेंगे। आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है और रिसर्च इस बारे में क्या कहती है।
समस्या की मुख्य वजह
तुरंत समाधान देने की आदत: जब बच्चा स्कूल या पढ़ाई के दबाव से परेशान होकर घर आता है तो वह तनाव में होता है। ऐसे में माता पिता तुरंत अपनी सलाह या ज्ञान देने लगते हैं।
भावनाओं को अनदेखा करना: बच्चों को लगता है कि उनकी बात को गहराई से सुने बिना ही माता पिता उसे बहुत छोटी समस्या मान रहे हैं।
सुनने वाले की कमी: इस उम्र में बच्चों को किसी एक्सपर्ट की सलाह से ज्यादा एक ऐसे इंसान की जरूरत होती है जो बस शांति से उनकी बात सुन सके।
रिसर्च क्या कहती है
पबमेड की रिसर्च: 13 से 16 साल के जिन बच्चों को यह महसूस होता है कि उनके पेरेंट्स बिना टोके उनकी बात सुनते हैं वे मानसिक रूप से ज्यादा संतुष्ट रहते हैं।
आजादी की चाह: टीनएज में बच्चे भावनात्मक साथ तो चाहते हैं लेकिन वे अपनी एक अलग और स्वतंत्र पहचान भी बनाना चाहते हैं।
अत्यधिक नियंत्रण से दूरी: माता पिता का बहुत ज्यादा रोक टोक करना बच्चों को अपनी आजादी पर पाबंदी जैसा लगता है।
बातचीत सुधारने का एक जादुई तरीका
अगली बार जब बच्चा आपके पास आए तो उससे सीधा यह सवाल पूछें: क्या तुम चाहते हो कि मैं सिर्फ तुम्हारी बात सुनूं या हम मिलकर इसका कोई हल निकालें।
अगर बच्चा कहे सिर्फ सुनो: तो बिना कोई सलाह दिए उसकी पूरी बात ध्यान से सुनें।
अगर बच्चा राय मांगे: तभी उसे अपने सुझाव दें और अपनी बात रखें।
डिजिटल डिटॉक्स टाइम: हफ्ते में कम से कम एक दिन ऐसा तय करें जब परिवार के सभी सदस्य बिना फोन और स्क्रीन के साथ बैठकर बात करें।
खुद फैसला लेने दें: छोटी मोटी समस्याओं में बच्चों को खुद रास्ता चुनने का मौका दें ताकि उनमें आत्मविश्वास बढ़े।
दोस्त की तरह व्यवहार: डांटने या हुकुम चलाने के बजाय एक दोस्त की तरह उनकी बात समझने की कोशिश करें।
हेमलता शर्मा जयपुर
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