
रिश्तों में दरार और तलाक के शुरुआती साल क्या कहती है रिसर्च
शादी जीवन की एक नई शुरुआत होती है लेकिन समय के साथ प्राथमिकताओं अपेक्षाओं और जिम्मेदारियों में बदलाव आता है।यही बदलाव कई बार जोड़ों के बीच दूरी की वजह बन जाता है।आज के दौर में वैवाहिक रिश्तों में तनाव और अलगाव के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है।जिससे यह समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर शादी के कौन से साल किसी भी रिश्ते के लिए सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित होते हैं।
शादी के कौन से साल होते हैं सबसे संवेदनशील
संबंधों पर आधारित विभिन्न अध्ययनों और आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आती है कि शादी के शुरुआती दो साल और फिर पांचवें से आठवें साल के बीच का समय रिश्तों के लिए सबसे अधिक संवेदनशील होता है।
विशेष रूप से सातवें और आठवें साल को रिश्तों के लिहाज से सबसे नाजुक दौर माना गया है। मनोविज्ञान में इसे अक्सर सेवन ईयर इच की अवधारणा से जोड़कर देखा जाता है। इस समय के दौरान अक्सर देखा जाता है कि शुरुआती आकर्षण कम होने लगता है और रोजमर्रा की दिनचर्या के कारण साथी एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से कटने लगते हैं।
रिश्तों में स्थिरता का दौर
जो जोड़े शादी के शुरुआती आठ से नौ सालों के कठिन समय को समझदारी और धैर्य से पार कर लेते हैं उनके रिश्ते में समय के साथ ज्यादा परिपक्वता आ जाती है। अध्ययनों के अनुसार नौवें से पंद्रहवें साल के बीच जोड़ों के बीच तलाक या अलगाव की संभावना काफी घट जाती है।इस चरण तक पहुंचते-पहुंचते पति-पत्नी एक-दूसरे की आदतों को बेहतर तरीके से समझ लेते हैं और करियर बच्चों के पालन-पोषण तथा पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच एक संतुलन बनाना सीख जाते हैं।
शादी टूटने और दरार आने के प्रमुख कारण
रिश्तों में दूरी आने के पीछे कई सामाजिक व्यक्तिगत और आर्थिक कारण जिम्मेदार होते हैं।
आर्थिक दबाव और तनाव: पैसों की तंगी बढ़ता कर्ज या अचानक नौकरी में अनिश्चितता जैसी स्थितियां घर में तनाव का सबसे बड़ा कारण बनती हैं।
बदलते लक्ष्य और सोच: समय के साथ इंसान के विचार बदलते हैं। यदि करियर भविष्य की योजनाओं या जीवनशैली को लेकर जीवनसाथी के विचारों में तालमेल न बैठे तो मतभेद बढ़ने लगते हैं।
संवाद की कमी और भावनात्मक दूरी: आपस में खुलकर बात न करना एक-दूसरे की बात न सुनना और भावनात्मक समर्थन न मिलना धीरे-धीरे रिश्ते की नींव कमजोर कर देता है।
अन्य गंभीर समस्याएं: घरेलू हिंसा बेवफाई और ससुराल पक्ष के साथ खराब तालमेल भी अलगाव की मुख्य वजहों में शामिल हैं। इसके अलावा बहुत कम उम्र में शादी होना और अपरिपक्वता में जिम्मेदारियां आ जाना भी रिश्ते को प्रभावित करता है।
रिश्तों को टूटने से कैसे बचाएं
रिश्ते में आ रही दूरी को सही समय पर समझकर उसे सुलझाया जा सकता है। इसके लिए दोनों साझेदारों को नियमित रूप से आपस में संवाद बनाए रखना चाहिए और एक-दूसरे के दृष्टिकोण को सम्मान देना चाहिए।
आर्थिक फैसलों में पारदर्शिता रखना और करियर के साथ-साथ निजी जीवन के लिए समय निकालना रिश्ते को मजबूत बनाता है। यदि मतभेद बहुत अधिक बढ़ जाएं तो किसी परामर्शदाता या मैरिज काउंसलर की मदद लेना भी एक बेहतर कदम साबित हो सकता है।
हेमलता शर्मा जयपुर
#ये बातें भूल कर भी न बताएं गर्लफ्रेंड को...






