कागज से भी हल्की कला की अनमोल धरोहर दिल्ली में मची पारंपरिक कंथा वर्क साड़ियों की धूम

कागज से भी हल्की कला की अनमोल धरोहर दिल्ली में मची पारंपरिक कंथा वर्क साड़ियों की धूम

हर टांके में छिपी महीनों की कड़ी मेहनत रंग-बिरंगे धागों का जादू और भारतीय हस्तकला की सदियों पुरानी विरासत यही पहचान है कंथा कढ़ाई की। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की इस पारंपरिक कला ने आज आधुनिक फैशन की दुनिया में अपनी एक विशिष्ट जगह बना ली है।
​हाल ही में दिल्ली के जनपथ स्थित हैंडलूम हाट में आयोजित कंथा वर्क साड़ी एक्सपो में इन साड़ियों को देखने और खरीदने के लिए महिलाओं और युवतियों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

​एक्सपो का मुख्य आकर्षण: स्टॉल नंबर 20
​इस प्रदर्शनी में पंजाब से आईं सोनिया मोहाली जो मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली हैं का स्टॉल नंबर 20 ग्राहकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सोनिया द्वारा प्रदर्शित की गई साड़ियों की महीन कारीगरी और उनका अनूठा कलेक्शन आने-जाने वालों को मंत्रमुग्ध कर रहा है।

​क्यों खास है यह कंथा वर्क कलेक्शन
​कागज जैसी हल्की: सोनिया मोहाली के अनुसार उनके पास मौजूद सभी साड़ियां शुद्ध कॉटन सूती से बनी हैं और इनका वजन कागज से भी हल्का महसूस होता है।
​100% हस्तनिर्मित : इन साड़ियों पर किसी मशीन का नहीं बल्कि सुई और धागे से बारीक रनिंग स्टिच  का उपयोग किया गया है।
अनोखा डिजाइन: पारंपरिक रूप से पुराने कपड़ों को नया रूप देने की कला से जन्मी इस विधा में दो साड़ियां कभी एक जैसी नहीं होतीं। इन पर प्रकृति के सुंदर रूप जैसे:फूल-पत्तियां और पेड़
रंग-बिरंगे पक्षी और मछलियां पारंपरिक लोककला और ज्यामितीय पैटर्न उकेरे गए हैं।
​महीनों की मेहनत: एक सिंगल कंथा साड़ी को पूरी तरह तैयार करने में कारीगरों को कई दिनों से लेकर कई हफ्तों तक का समय लगता है।

​हर अवसर के लिए है बिल्कुल परफेक्ट
​यह साड़ियां बेहद आरामदायक, हल्की और एलिगेंट लुक देने वाली हैं। इन्हें कामकाजी महिलाएं जैसे डॉक्टर्स टीचर्स कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स रोज़मर्रा के ऑफिस वियर से लेकर शादियों फेस्टिवल्स और कैजुअल फंक्शन्स तक हर मौके पर आसानी से कैरी कर सकती हैं। यह पारंपरिक होने के साथ-साथ एक बेहद मॉडर्न और प्रीमियम लुक देती हैं।

​बजट में है कीमत
​इस एक्सपो में कला प्रेमियों के बजट का भी खास ख्याल रखा गया है:
कंथा वर्क सूट: ₹1500 से शुरू
​कंथा वर्क साड़ियां: ₹2000 से शुरू

​यदि आप भी अपनी वार्डरोब में भारत की इस अनमोल हस्तशिल्प कला को शामिल करना चाहते हैं, तो दिल्ली के जनपथ हैंडलूम हाट में जाकर इस शानदार कलेक्शन का लुत्फ उठा सकते हैं।
हेमलता शर्मा जयपुर

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