
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती हैं पैरेंटिंग की ये सामान्य गलतियां
संतान का पालन पोषण करना हर माता पिता के लिए एक बड़ा उत्तरदायित्व होता है। हर अभिभावक अपने बच्चों को खुशियां देना चाहता है परंतु हालिया मनोवैज्ञानिक अध्ययनों में कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिसर्च के अनुसार पैरेंट्स की कुछ ऐसी आदतें जिन्हें वे बहुत ही साधारण मानते हैं वास्तव में बच्चों के आत्मसम्मान और मानसिक विकास को गहरे जख्म दे रही हैं। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए अभिभावकों को अपनी इन 5 आदतों को तुरंत बदलना होगा।
जरूरत से ज्यादा सुरक्षात्मक होना:
आजकल के पैरेंट्स बच्चों को लेकर इतने संवेदनशील रहते हैं कि उनके जीवन की हर छोटी बड़ी मुश्किल खुद ही हल करने का प्रयास करते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चों को हर कठिनाई से बचाकर रखने का यह तरीका उन्हें मानसिक रूप से कमजोर और दूसरों पर आश्रित बना देता है। ऐसे बच्चे आगे चलकर स्वतंत्र रूप से कोई निर्णय नहीं ले पाते।
दूसरों के बच्चों से लगातार मुकाबला करना:
अक्सर घरों में बच्चों को प्रेरित करने के लिए उनके दोस्तों या रिश्तेदारों के बच्चों का उदाहरण दिया जाता है। माता पिता को लगता है कि इससे बच्चा बेहतर करेगा लेकिन इसका परिणाम बिल्कुल उल्टा होता है। लगातार दूसरों से कम आंके जाने के कारण बच्चों के भीतर आत्मविश्वास समाप्त होने लगता है और वे खुद को दूसरों से कमतर समझने लगते हैं।
कमियों का उपहास उड़ाना और टोकना:
कई बार माता पिता हंसी मजाक में ही बच्चों के शारीरिक गठन वजन या उनकी मंद बुद्धि पर तंज कस देते हैं। भले ही यह बात किसी दुर्भावना से न कही गई हो पर बच्चे के कोमल मन पर इसका बहुत बुरा असर पड़ता है। लगातार मिलने वाली यह मानसिक प्रताड़ना बच्चों को समाज से दूर और एकांतप्रिय बना देती है।
गलतियों पर भी झूठी सराहना करना:
बच्चों का मनोबल बढ़ाना अच्छी बात है परंतु उनकी गलत आदतों और गलतियों पर पर्दा डालना या उनकी झूठी तारीफ करना नुकसानदेह होता है। जब पैरेंट्स अपने बच्चों की हर अनुचित बात का समर्थन करने लगते हैं तो बच्चों में अहंकार की भावना आ जाती है। इसके कारण वे अपनी कमियों को स्वीकार करना और उनसे सीखना बंद कर देते हैं।
अत्यधिक क्रोध और चीखने चिल्लाने का माहौल:
बच्चे के गलती करने पर उस पर गुस्सा करना या चिल्लाना उस समय भले ही कारगर लगे लेकिन भविष्य में इसके भयंकर परिणाम होते हैं। हर समय तनाव और डर के साए में रहने वाले बच्चे चिड़चिड़े और बागी स्वभाव के हो जाते हैं। डांट के खौफ से वे अपनी परेशानियां माता पिता से छुपाने लगते हैं जिससे आपसी संवाद पूरी तरह टूट जाता है।
पेरेंटिंग के जानकारों का कहना है कि दुनिया में कोई भी माता पिता शत प्रतिशत परफेक्ट नहीं होते। सबसे जरूरी बात यह है कि हम अपनी इन अनजानी गलतियों को समझें। बच्चों को डराने या उन पर हुक्म चलाने के बजाय उनके साथ मित्रवत व्यवहार करें और उन्हें प्यार से सही राह दिखाएं।
-हेमलता शर्मा, जयपुर
#ये बातें भूल कर भी न बताएं गर्लफ्रेंड को...






