
माइग्रेन के दर्द को बढ़ा सकती हैं ये 5 गलतियां, छोटी-छोटी आदतों में बदलाव से मिलेगी राहत
आज की तनावपूर्ण और व्यस्त जीवनशैली में सिरदर्द एक बेहद आम समस्या बन चुका है, लेकिन हर सिरदर्द सामान्य नहीं होता। तेज टीस मारता दर्द, रोशनी व आवाज से चिड़चिड़ापन, जी मिचलाना और सिर के एक हिस्से में भारीपन महसूस होना माइग्रेन का संकेत है।
यह केवल एक शारीरिक बीमारी नहीं, बल्कि हमारे तंत्रिका तंत्र और जीवनशैली से जुड़ा एक गहरा विकार है। एलोपैथी में जहाँ दर्द निवारक गोलियों से तात्कालिक राहत दी जाती है, वहीं होम्योपैथी माइग्रेन को जड़ से खत्म करने के लिए रोगी की संपूर्ण शारीरिक, मानसिक स्थिति और दैनिक आदतों का अध्ययन करती है।
जयपुर के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. एन. सी. पंवार के अनुसार, माइग्रेन का दर्द अक्सर मरीज की दिनचर्या में होने वाली छोटी-छोटी गलतियों से भड़कता है। आइए जानते हैं जीवनशैली से जुड़ी वे कौन-सी 5 बड़ी गलतियां हैं जो माइग्रेन को बढ़ाती हैं और होम्योपैथी इन्हें किस नजरिए से देखती है:-
शरीर में पानी की कमीः
दिनभर में कम पानी पीने से शरीर का संतुलन बिगड़ता है और सिर में भारीपन व थकान होने लगती है। होम्योपैथी में डिहाइड्रेशन या अत्यधिक प्यास/बिना प्यास वाले लक्षणों के आधार पर नेट्रम म्यूर (Natrum Mur) या ब्रायोनिया (Bryonia) जैसी दवाएं मरीज को दी जाती हैं, जो शरीर में तरल पदार्थों के संतुलन को बेहतर बनाती हैं।
अथाह तनाव और नींद में लापरवाही:
समय पर न सोना या नींद का पैटर्न बदलना माइग्रेन के सबसे बड़े ट्रिगर्स में से एक है। जो लोग मानसिक तनाव, अत्यधिक पढ़ाई या देर रात जागने के कारण माइग्रेन से पीड़ित होते हैं, होम्योपैथी में उनके लिए नक्स वोमिका (Nux Vomica) या काली फॉस (Kali Phos) जैसी बेहद असरदार दवाएं मौजूद हैं, जो तंत्रिका तंत्र को शांति प्रदान करती हैं।
चाय, कॉफी, शराब व डिब्बाबंद खाने का अत्यधिक सेवन:
सिरदर्द में बार-बार कड़क चाय या कॉफी पीना शरीर में कैफीन की मात्रा बढ़ाकर समस्या को और गंभीर कर देता है। इसके अलावा मसालेदार व तला हुआ खाना खाने वाले रोगियों के लिए होम्योपैथी में मरीज की व्यक्तिगत प्रकृति के अनुसार पल्सटिला (Pulsatilla) या नक्स वोमिका का चयन किया जाता है।
लगातार स्क्रीन टाइम और आँखों पर दबाव:
कंप्यूटर, मोबाइल या टीवी की तेज रोशनी और स्क्रीन की ब्राइटनेस माइग्रेन अटैक को तुरंत ट्रिगर कर देती है। रोशनी व आवाज से संवेदनशीलता महसूस होने पर होम्योपैथी की बैलाडोना (Belladonna) या स्पाइजेलिया (Spigelia) दवा दर्द की तीव्रता को कम करने में असरदार सिद्ध होती है।
भूखे पेट रहना और भोजन का समय बदलना:
लंबे समय तक खाली पेट रहने से पेट में गैस और एसिडिटी बनती है, जो सीधे सिर में जाकर दर्द का कारण बनती है। गैस्ट्रिक माइग्रेन के ऐसे मामलों में होम्योपैथिक चिकित्सा मरीज के पाचन चक्र को दुरुस्त कर सिरदर्द को नियंत्रित करती है।
होम्योपैथिक दृष्टिकोण:
होम्योपैथी में एक ही दवा सबको देने का नियम नहीं है। यहाँ मरीज के मानसिक लक्षण, दर्द की दिशा (दाएं या बाएं तरफ का सिरदर्द) और ट्रिगर्स को ध्यान में रखकर माइग्रेन का स्थायी उपचार किया जाता है। अपनी जीवनशैली में सुधार करें, पर्याप्त पानी पीएं और माइग्रेन से मुक्ति पाने के लिए किसी कुशल होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
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