कड़वे नीम के मीठे गुण : नीम के पत्तों के रस सेवन के फायदे और सावधानियां

कड़वे नीम के मीठे गुण : नीम के पत्तों के रस सेवन के फायदे और सावधानियां

नई दिल्ली। नीम का नाम सुनते ही मुंह कड़वा और कसैला हो जाता है। इसके पत्तों को चबाकर निगल पाना हर किसी के लिए बड़ा टास्क है, लेकिन थोड़े पानी और नीम के पत्तों के साथ बना रस शरीर को बीमारियों से मुक्त कर देगा। नीम भले ही कड़वा होता है लेकिन इसके गुण मीठे होते हैं। 

नीम में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने से लेकर रक्त को शुद्ध करने का काम करते हैं। पेट से जुड़े रोगों के लिए नीम के पत्तों से बना रस दवा की तरह काम करता है। यह कब्ज, गैस, पेट फूलना और अल्सर जैसे पेट से जुड़े रोगों को नियंत्रित करता है और पेट और आंतों को साफ करने में मदद करता है। 

बदलते मौसम के साथ अगर संक्रमण पकड़ लेता है तो ये संकेत हैं कि रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो गई है। ऐसे में नीम के पत्तों से बना रस रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है और संक्रमण से लड़ने की शक्ति शरीर को देता है। इतना ही नहीं, अगर शरीर के अंदर किसी तरह की सूजन भी है, तो भी नीम के पत्तों का रस कारगर तरीके से काम करता है। 

नीम के पत्तों से बने रस में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो घाव भरने में मदद करते हैं। अगर मुंह के छाले या पेट के छालों से खाने-पीने में दिक्कत रहती है, तो ये रस दवा की तरह काम करेगा। सदियों से शारीरिक घावों को ठीक करने के लिए नीम के पत्तों के पेस्ट का इस्तेमाल होता जा रहा है। ये बाहरी घावों से लेकर आंतरिक घावों को भरने में मदद करता है। 

आज की जीवनशैली की वजह से डायबिटीज आम है, और नीम डायबिटीज का काल है, लेकिन अगर लोग नीम के रस का सेवन शुरू कर दें तो ऐसी स्थितियों को होने से रोका जा सकता है। नीम के पत्तों से बने इस रस में एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं, जो शर्करा को रक्त में बढ़ने नहीं देते हैं। 

अब सावधानियों की बात करें तो नीम के पत्तों का रस बेहद कड़वा और कसैला होता है, तो इसका सेवन सीमित मात्रा में करें। अगर आप गर्भवती हैं, तब भी नीम के सेवन से परहेज करें। इसके अलावा, अगर किसी तरह की दवा का सेवन कर रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर ही रस का सेवन करें। 

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