
बच्चों के सोने का सही समय और उनके दिमाग पर इसका असर
आजकल की व्यस्त जीवनशैली और गैजेट्स के बढ़ते इस्तेमाल के कारण बच्चे देर रात तक जागते रहते हैं। माता-पिता अक्सर इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि बच्चों को किस समय सुला देना चाहिए ताकि उनकी सेहत पर कोई बुरा असर न पड़े। डॉक्टरों और चाइल्ड स्पेशलिस्ट के अनुसार रात में बच्चों के सोने का समय उनके मानसिक और शारीरिक विकास को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
समय के अनुसार बच्चों की सेहत पर होने वाले असर की पूरी जानकारी
रात 8 से 9 बजे का समय सबसे बेहतर
यह बच्चों के सोने का सबसे सही और आदर्श समय माना जाता है। इस समय सोने से बच्चों को गहरी नींद मिलती है जिससे उनका दिमाग शांत रहता है और सुबह वे पूरी ऊर्जा के साथ उठते हैं।
रात 10 बजे तक सोना सामान्य
अगर किसी वजह से बच्चा आठ बजे नहीं सो पाता है तो रात दस बजे तक का समय भी स्वीकार्य माना जाता है। हालांकि इससे ज्यादा देर करना बच्चों के रूटीन को बिगाड़ सकता है।
रात 11 से 12 बजे तक जागना नुकसानदेह
देर रात ग्यारह या बारह बजे तक जागने वाले बच्चों के शरीर में जरूरी हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ जाता है। इसका सीधा असर उनकी लंबाई और शारीरिक विकास पर पड़ता है।
रात 1 बजे तक जागने के गंभीर पपरिणाम
जो बच्चे आधी रात के बाद तक जागते हैं उनमें चिड़चिड़ापन पढ़ाई में मन न लगना और मानसिक थकान जैसी समस्याएं बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं।
देर से सोने के मुख्य नुकसान
बच्चों की याददाश्त कमजोर होने लगती है और वे चीजें जल्दी भूलने लगते हैं। सुबह समय पर न उठ पाने के कारण उनकी स्कूल की पढ़ाई प्रभावित होती है। चिड़चिड़ेपन के कारण बच्चों का स्वभाव जिद्दी होने लगता है। शारीरिक विकास रुकने और वजन असंतुलित होने का खतरा बढ़ जाता है
हेमलता शर्मा जयपुर
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