पितृ पक्ष में तर्पण की सही विधि और नियम, जानें पूर्वजों की तृप्ति के अचूक उपाय

पितृ पक्ष में तर्पण की सही विधि और नियम, जानें पूर्वजों की तृप्ति के अचूक उपाय

पितृ पक्ष में पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने और उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए तर्पण परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि तर्पण से केवल हमारे पूर्वज ही प्रसन्न नहीं होते बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार के जीवन पर पड़ता है। तर्पण के जल से प्राप्त होने वाले सूक्ष्म कण अलग अलग योनियों में मौजूद पूर्वजों को उनकी आवश्यकता के अनुसार आहार और संतोष प्रदान करते हैं। इसके प्रभाव से व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और प्रगति मिलती है।


​तर्पण मुख्य रूप से छह पद्धतियों से संपन्न किया जाता है। इनमें देव तर्पण ऋषि तर्पण दिव्य मानव तर्पण दिव्य पितृ तर्पण यम तर्पण और मनुष्य पितृ तर्पण शामिल हैं। इन सभी तर्पणों का अपना विशेष महत्व और विधान होता है।


​तर्पण की सही सामग्री और विधि का पालन करना अनिवार्य है। इसके लिए एक साफ पात्र में शुद्ध जल लें और उसमें दूध काले तिल जौ अक्षत तथा थोड़ा सा गंगाजल मिलाएं। इस प्रक्रिया को हमेशा स्वच्छ और पवित्र वस्त्र धारण करके पूर्ण भक्ति भाव से करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बिना श्रद्धा और नियम के किया गया कार्य पूर्ण फल प्रदान नहीं करता है।


​तर्पण करते समय दिशा और मुद्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जल पात्र हाथ में लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करें और बायां घुटना मोड़कर बैठ जाएं। जनेऊ धारण करने वाले व्यक्तियों को अपना जनेऊ बाएं कंधे से हटाकर दाएं कंधे पर रखना चाहिए। इसके बाद हाथ के अंगूठे के माध्यम से जल को धीरे धीरे अर्पित करना चाहिए। इस विशेष स्थिति को पितृ तीर्थ मुद्रा कहा जाता है। इसी भाव और मुद्रा में रहते हुए अपने सभी पूर्वजों का ध्यान करें और प्रत्येक पितर के नाम से तीन तीन अंजलि जल समर्पित करें। सही नियमों का पालन करने से पितरों का आशीर्वाद सदैव बना रहता है।

हेमलता शर्मा जयपुर

#बॉलीवुड सेलिब्रिटीज सफेद रंग के लिबास में



Warning: PHP Startup: Unable to load dynamic library '/opt/cpanel/ea-php54/root/usr/lib64/php/modules/xsl.so' - /lib64/libxslt.so.1: symbol xmlGenericErrorContext, version LIBXML2_2.4.30 not defined in file libxml2.so.2 with link time reference in Unknown on line 0