
बच्चों की जेब में समझ का सिक्का: सही उम्र और तरीके से दें पॉकेट मनी, बनेंगे जिम्मेदार
आजकल बच्चों को पैसों की कद्र सिखाना माता-पिता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस बीच विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि अगर बच्चों को सही समय और सही तरीके से पॉकेट मनी दी जाए तो वे कम उम्र में ही वित्तीय रूप से जिम्मेदार बन सकते हैं। सही पॉकेट मनी से बच्चे न केवल बजट बनाना सीखते हैं, बल्कि उनमें बचत और सही जगह खर्च करने की आदत भी विकसित होती है।
माता-पिता के लिए विशेषज्ञों के मुख्य सुझाव:
शुरुआत और सही उम्र: बच्चों को 6 से 8 साल की उम्र के बाद ही पॉकेट मनी देना शुरू करें, क्योंकि इसी उम्र से वे पैसों के बुनियादी गणित और उसकी कीमत को समझने लगते हैं।
सीमित रकम: शुरुआती दौर में बच्चों को बहुत ज्यादा पैसे न दें। एक छोटी और तय रकम से शुरुआत करें ताकि वे सीमित साधनों में प्रबंधन सीखें।
शर्तों से रखें दूर: पॉकेट मनी को बच्चे की पढ़ाई या अच्छे व्यवहार के इनाम से न जोड़ें। इसे केवल उन्हें पैसों का सही इस्तेमाल सिखाने का एक जरिया बनाएं।
बचत की आदत: बच्चों को पॉकेट मनी का कुछ हिस्सा गुल्लक या पिगी बैंक में जमा करने के लिए प्रेरित करें, जिससे उनमें भविष्य के लिए बचत करने का विचार पैदा हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि पॉकेट मनी का मुख्य उद्देश्य बच्चों को फिजूलखर्ची से बचाना और उन्हें एक समझदार व आत्मनिर्भर नागरिक बनाना है।
हेमलता शर्मा जयपुर
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