
बच्चे की जिद से हैं परेशान तो अपनाएं यह खास पैरेंटिंग फॉर्मूला, बदल जाएगी आदत
अक्सर देखा जाता है कि छोटे बच्चे अपनी बात मनवाने के लिए बेहद जिद्दी और चिड़चिड़े हो जाते हैं। कई बार जब माता पिता बच्चों को लेकर किसी सार्वजनिक जगह या बाजार जाते हैं तो बच्चे किसी खिलौने या सामान के लिए जिद करने लगते हैं। कुछ बच्चे जमीन पर बैठकर रोने और चिल्लाने लगते हैं। ऐसी स्थिति में अक्सर माता पिता समझ नहीं पाते कि वे क्या करें और वे काफी परेशान हो जाते हैं।
इस विषय पर बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि जब बच्चा बाहर जिद करता है तो ज्यादातर माता पिता दो तरह की गलतियां करते हैं। पहली गलती यह होती है कि वे आसपास मौजूद लोगों के बारे में सोचकर और शर्मिंदगी से बचने के लिए बच्चे की जिद पूरी कर देते हैं। दूसरी गलती यह होती है कि कुछ माता पिता गुस्से में आकर बच्चे को डांटने या पीटने लगते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह दोनों ही तरीके पूरी तरह से गलत हैं।अगर आप बच्चे के रोने या तमाशा करने पर उसकी मांग पूरी करते हैं तो बच्चे के मन में यह बात बैठ जाती है कि चिल्लाकर अपनी बात मनवाई जा सकती है। इससे उसकी जिद करने की आदत और ज्यादा बढ़ जाती है। वहीं दूसरी ओर बच्चे पर हाथ उठाने या डांटने से उसके दिमाग पर नकारात्मक असर पड़ता है और वह भी आक्रामक होने लगता है।
ऐसे मामलों में विशेषज्ञों ने एक बहुत ही कारगर तरीका बताया है। अगर बच्चा किसी दुकान या बाजार में जिद कर रहा है तो सबसे पहले आसपास के लोगों पर ध्यान देना बंद करें। बच्चे से किसी भी तरह की बहस न करें। बिना गुस्सा किए बच्चे को शांत मन से वहां से उठाएं और सीधे घर वापस आ जाएं। भले ही आपकी खरीदारी अधूरी रह जाए लेकिन बच्चे को वहां से हटाना जरूरी है। इससे बच्चे को यह संदेश मिलता है कि जिद करने से उसकी बात कभी नहीं मानी जाएगी।
जब बच्चा घर आकर शांत हो जाए तब उसे प्यार से समझाएं। उसे बताएं कि उसकी जिद के कारण ही आपको खरीदारी छोड़कर वापस आना पड़ा। शुरुआत में बच्चा एक दो बार फिर ऐसा कर सकता है लेकिन अगर माता पिता अपने नियमों पर कायम रहें तो बच्चा धीरे धीरे यह आदत छोड़ देता है। पैरेंटिंग में निरंतरता और संयम सबसे जरूरी है। घर हो या बाहर नियम हमेशा एक जैसे रहने चाहिए।
हेमलता शर्मा जयपुर
#पहने हों कछुआ अंगूठी तो नहीं होगी पैसों की तंगी...






