
Relationship : जब सहकर्मी बन जाए हमसफ़र वर्कप्लेस रोमांस और शादी
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में दफ्तर सिर्फ काम करने की जगह नहीं, बल्कि जीवनसाथी चुनने का एक बड़ा जरिया भी बनते जा रहे हैं। सुबह से शाम तक साथ काम करते-करते सहकर्मियों के बीच की दोस्ती अक्सर प्यार में बदल जाती है। फोर्ब्स के एक हालिया सर्वे के मुताबिक दुनिया भर में वर्कप्लेस रोमांस का चलन तेजी से बढ़ रहा है। आइए जानते हैं इससे जुड़े मुख्य आंकड़े और कारण।
दफ्तर में प्यार और शादी के आंकड़े:
रोमांस का अनुभव:
सर्वे के अनुसार 60% से अधिक लोग अपने कामकाजी जीवन में कभी न कभी ऑफिस रोमांस का हिस्सा रहे हैं।
शादी का सफर:
राहत की बात यह है कि ये रिश्ते सिर्फ टाइमपास नहीं होते। ऑफिस से शुरू हुए 43% रिश्ते आगे चलकर शादी के अटूट बंधन में बदल जाते हैं।
क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड:
आपसी तालमेल :
लगभग 65% लोगों का मानना है कि रोज साथ काम करने से वे एक-दूसरे के स्वभाव और आदतों को बेहतर समझ पाते हैं जिससे रिश्ता बनना आसान हो जाता है।
समय की कमी :
करीब 61% कामकाजी लोगों के पास दफ्तर के बाहर नई सोशल लाइफ जीने या नए लोगों से मिलने का समय नहीं होता। ऐसे में सहकर्मी ही सबसे करीबी विकल्प बन जाते हैं। इसके अलावा पार्टनर एक ही माहौल में होने के कारण एक-दूसरे की प्रोफेशनल लाइफ वर्क स्ट्रेस और डेली रूटीन को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं।
वर्कप्लेस रिलेशनशिप की चुनौतियां:
सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि 24 घंटे साथ रहने के अपने रिस्क हैं:
ब्रेकअप का डर:
ऐसे रिश्तों में आम रिलेशनशिप की तुलना में ब्रेकअप का खतरा 17% ज्यादा होता है जिसका सीधा असर प्रोफेशनल लाइफ पर पड़ता है।
वर्क-लाइफ बैलेंस:
करीब 54% लोगों के लिए पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को अलग रखना मुश्किल हो जाता है।
गॉसिप और पक्षपात:
52% लोगों ने माना कि रिश्ता सामने आने के बाद सहकर्मियों का व्यवहार बदल जाता है वहीं 50% का मानना है कि इससे ऑफिस में फेवरिटिज्म पक्षपात को बढ़ावा मिलता है।
तमाम चुनौतियों और गॉसिप्स के बावजूद आंकड़े बताते हैं कि अगर समझदारी और मैच्योरिटी दिखाई जाए तो ऑफिस का डेस्क पार्टनर जिंदगी का सबसे बेहतरीन लाइफ पार्टनर बन सकता है।
-हेमलता शर्मा, जयपुर
#क्या देखा अपने उर्वशी रौतेला का गॉर्जियास अवतार






