Parenting Tips: परफेक्ट पेरेंट बनने के लिए बच्चों पर न डालें प्रेसर, होता है मानसिक तनाव

Parenting Tips: परफेक्ट पेरेंट बनने के लिए बच्चों पर न डालें प्रेसर, होता है मानसिक तनाव

आज के समय में हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ाई, खेल और करियर हर चीज़ में सबसे आगे रहे। इसी चाह में कई बार अनजाने में बच्चों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल दिया जाता है। अच्छे नंबर लाने, हर कंपटीशन जीतने और दूसरों से बेहतर बनने का प्रेशर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है। परफेक्ट पेरेंट बनने का मतलब यह नहीं कि बच्चे से परफेक्शन की उम्मीद की जाए, बल्कि उसे समझना और सपोर्ट करना ज्यादा जरूरी है।

बच्चों पर ज्यादा दबाव डालने का क्या होता है असर
लगातार प्रेशर में रहने से बच्चे तनाव, डर और घबराहट महसूस करने लगते हैं। कई बच्चों में आत्मविश्वास की कमी आने लगती है और वे खुद को दूसरों से कम समझने लगते हैं। कुछ मामलों में बच्चों में चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या और पढ़ाई से मन हटना भी देखने को मिलता है। लंबे समय तक मानसिक तनाव रहने से बच्चे डिप्रेशन की ओर भी जा सकते हैं।

हर बच्चे की क्षमता होती है अलग
हर बच्चा अलग होता है और उसकी सोच, समझ और टैलेंट भी अलग-अलग होता है। किसी बच्चे को पढ़ाई में रुचि होती है, तो कोई खेल, म्यूजिक या आर्ट में अच्छा होता है। एक ही पैमाने पर सभी बच्चों को तौलना सही नहीं है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे की ताकत पहचानें और उसी दिशा में उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।

तुलना करना सबसे बड़ी गलती

अक्सर माता-पिता अपने बच्चे की तुलना दूसरों के बच्चों से करने लगते हैं। यह तुलना बच्चे के मन में हीन भावना पैदा कर सकती है। बच्चे को यह महसूस होने लगता है कि वह अपने माता-पिता के लिए काफी नहीं है। तुलना की बजाय बच्चे की छोटी-छोटी उपलब्धियों की तारीफ करना ज्यादा असरदार होता है।

बच्चों से खुलकर बात करें

अगर बच्चा किसी बात को लेकर परेशान है, तो उससे डांटने की बजाय प्यार से बात करें। उसकी बातें ध्यान से सुनें और उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। जब बच्चे को लगता है कि उसके माता-पिता उसे समझते हैं, तो वह खुद को सुरक्षित और मजबूत महसूस करता है।

सपोर्टिव बनें, पर कंट्रोलिंग नहीं

बच्चों को गाइड करना जरूरी है, लेकिन हर फैसले पर कंट्रोल करना सही नहीं। उन्हें खुद फैसले लेने का मौका दें और गलती होने पर सीखने दें। यही तरीका बच्चों को जिम्मेदार और आत्मनिर्भर बनाता है।

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